एचपीसीए केस में फैसला सुरक्षित

शिमला(वीरेन्द्र खागटा)हिमाचल हाईकोर्ट ने एचपीसीए पदाधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के आग्रह की याचिका में दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। सोमवार को यह मामला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई को लगा। इसी केस में विजिलेंस पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और अनुराग ठाकुर के खिलाफ चार्जशीट दायर करने वाली है।
एचपीसीए की ओर से पीएस पटवालिया ने कहा कि विजिलेंस चार्जशीट दायर करने की जल्दबाजी में है, ताकि राजनीतिक उद्देश्य पूरा किया जा सके। प्रशासनिक अफसरों को पिक एंड चूज आधार पर निशाना बनाया जा रहा है। केस में जब तत्कालीन मुख्यमंत्री धूमल और खेल निदेशक अजय शर्मा आरोपी हैं तो सचिव टीजी नेगी क्यों नहीं? जिन अफसर ने धर्मशाला स्टेडियम की लीज साइन की, वह भी आरोपी नहीं है। 120 घंटे में अभियोजन मंजूरी हो गई। उन्होंने अपील की कि अभियोजन से संबंधित रिकार्ड कोर्ट में मंगवाया जाए। सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता श्रवण डोगरा ने दलील दी कि एचपीसीए ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत सरकारी भूमि को अपने नाम करवाया। एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच एजेंसी ने जांच पूरी कर ली है और चार्जशीट तैयार है। इसमें एचपीसीए पदाधिकारियों पर आपराधिक मामला बनता है। इन परिस्थितियों में एफआईआर को निरस्त करना हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार में नहीं आता। एचपीसीए ने अदालत से गुहार लगाई थी कि अदालत का फैसला आने तक सरकार को उनके खिलाफ चार्जशीट दायर करने से रोका जाए। इस पर महाधिवक्ता ने अदालत को आश्वस्त किया कि तब तक चार्जशीट दायर नहीं की जाएगी, जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता।

सीएम को प्रतिवादी बनाने पर सुनवाई 29 को
एचपीसीए केस में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को निजी तौर पर प्रतिवादी बनाए जाने की याचिका पर सुनवाई 29 अप्रैल तक टल गई। इस मामले में सरकार ने हाईकोर्ट में आवेदन दायर कर एचपीसीए लीज मामले में 8 जनवरी को पारित आदेशों को स्पष्ट करने की गुहार लगाई। हाईकोर्ट ने 8 जनवरी को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, डीजीपी संजय कुमार, जिलाधीश कांगड़ा सी. पालरासू और कांगड़ा के एसपी बलबीर सिंह को प्रतिवादी बनाए जाने के लिए दायर आवेदन को ठुकरा दिया था। एचपीसीए इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई और हाईकोर्ट का आदेश निरस्त हो गया। सोमवार को एचपीसीए ने रजिस्ट्रार सहकारी सभाएं को भी प्रतिवादी बनाने का आग्रह किया तो सरकार की ओर से जवाब दायर करने के लिए समय मांगा गया।

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