
बिलासपुर(सोनू शर्मा)सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग (आईपीएच) ने ग्राम पंचायतों को आवंटित की गई ‘वाटर टेस्टिंग किटों’ का उपयोग नहीं हो रहा है। दो साल पहले किटों के आवंटन के साथ ही पंचायतों के प्रतिनिधियों को बाकायदा पानी की जांच की ट्रेनिंग भी दी गई थी। विभाग का वक्त और लाखों रुपया एक तरह से जाया हो गया। विभागीय सूत्र बताते हैं कि पंचायतें वाटर टेस्टिंग में किसी तरह की रुचि नहीं दिखा रही है।
लगभग दो वर्ष पूर्व आईपीएच महकमे ने जिले की 151 पंचायतों में कई वाटर टेस्टिंग किटें बांटी थीं। 2000 रुपये प्रति किट पर खर्चा किया गया। इसके बाद इनका उपयोग हुआ या नहीं। इन किटों से पंचायत अपने स्तर पर पानी की शुद्धता की जांच सकती है। पंचायतों में तैनात वाटर गार्ड इसकी जांच करते हैं या नहीं। इसका किसी को पता नहीं है। आईपीएच विभाग की मानें तो कुछेक पंचायतों में ही इनका प्रयोग होता होगा। पंचायतें इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। पानी की खराबी पर इसकी सूचना आईपीएच महकमे को दी जानी थी। इसके बाद विभाग अपनी लैब में नए सिरे से पानी के सैंपल भरकर जांच करेगा। ऐसा हुआ नहीं। किसी भी पंचायत से पानी को लेकर कोई शिकायत नहीं पहुंची।
किटों का इस्तेमाल हो रहा है या नहीं। इसकी जानकारी आईपीएच विभाग को नहीं है। पानी को लेकर किसी भी तरह की शिकायत विभाग के पास नहीं पहुंची है। कितनी पंचायतें इसे नियमित रूप से इस्तेमाल कर रही है और कितनी नहीं। ये आंकड़े भी विभाग के पास नहीं है। जिला परिषद अध्यक्ष कुलदीप ठाकुर ने कहा कि आईपीएच द्वारा जारी किटों की वैरीफिकेशन तक नहीं हो रही है। विभाग की लिस्ट के अनुसार पांच प्रतिशत किटें ही ट्रेस हो पाई हैं। ऐसे में किटों का इस्तेमाल हो रहा है या नहीं कुछ कहा नहीं जा सकता।
कोड्स
1. आईपीएच विभाग ने दो साल पहले किटें आवंटित की है। पंचायत प्रतिनिधियों को बाकायदा इसकी ट्रेनिंग भी दी गई है। विभाग के पास पानी को लेकर कोई शिकायत नहीं पहुंची।
-पीसी ठाकुर, अधिशासी अभियंता आईपीएच।
2. पंचायतों को आईपीएच ने किटें दी हैं। वाटर गार्डों को ट्रेनिंग दी जा रही है।
-रूप लाल ठाकुर, प्रधान सिहड़ा पंचायत।
3. पानी की सप्लाई यदि पंचायतों के हवाले दी है तो विभाग द्वारा ट्रेंड अधिकारी ही इसके जिम्मेवार होंगे। किटें बांटी हैं तो पंचायतों को इसका सदुपयोग करना चाहिए।
-प्रदीप ठाकुर, एडीएम बिलासपुर
