
रोहड़ू( सुंदर औक्टा)मौसम के बिगड़े मिजाज के चलते तीन हजार करोड़ के बागवानी उद्योग पर संकट के बादल छा गए हैं। घट रहे तापमान से पौधों में निकल रहे फूलों का विकास प्रभावित हुआ है। दो दिन से लगातार हो रही वर्षा के कारण सेब की सेटिंग भी प्रभावित हो रही है। इससे अच्छी फसल की आस लगाए बैठे बागवानों की चिंता बढ़ गई है।
सेब की सेटिंग के लिए फूल खिलते समय दिन का तापमान 18 से 25 डिग्री सेल्सियस होना आवश्यक है। इससे कम तापमान में फूल का सही विकास नहीं हो पाता है। बारिश के बाद दिन के समय दो दिन से अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस से नीचे चल रहा है। इस कारण फूलों के विकास के साथ-साथ परागण की प्रक्रिया भी रुक गई है। शिमला जिले में चौपाल, कोटखाई, जुब्बल, रोहडू व चिड़गांव क्षेत्र में सेब की सबसे अधिक पैदावार होती है। आजकल चार हजार फुट से छह हजार फुट की ऊंचाई तक के बागीचों में फूल निकलने की प्रक्रिया चल रही है। इस क्षेत्र में ही सेब की 60 से 70 प्रतिशत की पैदावार होती है। मौसम के बिगड़े मिजाज व अनुकूल तापमान के कारण अब फसल के प्रभावित होने की पूरी संभावनाएं हैं। बागवानों ने कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों के बागीचों में परागण के लिए मधुमक्खियों के बक्से लगाए हुए हैं, लेकिन बारिश के बीच मक्खियां परागण के लिए बक्सों से बाहर नहीं आ रही हैं। वर्षा फूलों के पराग को भी हानि पहुंचा रही है। ठंड की अधिकता के कारण सेटिंग के लिए आवश्यक मित्र कीटों को भी नुकसान हो रहा है।
उद्यान विकास अधिकारी रोहड़ू डा. आगर दास ने बताया कि खराब मौसम के चलते सेब के फूलों को नुकसान हो रहा है। तापमान भी काफी कम है। वर्षा के कारण दिन के समय मधुमक्खियां व अन्य मित्र कीट भी बागीचों में नहीं निकल रहे हैं। उद्यान विकास अधिकारी कोटखाई जगदीश कुमार ने बताया कि तापमान में गिरावट से फ्लावरिंग की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
