न फार्मासिस्ट मिले, न कोई चिकित्सक

जुखाला/ बिलासपुर(सोनू शर्मा)स्वास्थ्य विभाग में स्टाफ की कमी लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। पंचायत स्तर पर आयुर्वेदिक अस्पताल तो सरकार ने खोल रखे हैं, लेकिन वहां स्टाफ मुहैया नहीं करवाया। अस्पताल की चौखट पर पहुंचने वाले मरीज मायूस होकर खाली हाथ लौटने को विवश हैं। इससे मरीजों का मर्ज दूर होने की बजाए बढ़ रहा है। जिले के छह ऐसे आयुर्वेदिक अस्पताल हैं, जहां पर न तो चिकित्सक तैनात हुए हैं और न ही कोई फार्मासिस्ट। कहीं पर चौकीदार जिम्मा संभाले हुए है, तो कहीं चपरासी। विभिन्न पंचायतों में खुले इन आयुर्वेदिक अस्पतालों में कोई खैर खबर लेने वाला न होने से लगभग 15 हजार की आबादी प्रभावित हो रही है। इलाज के लिए लोग कई किलोमीटर दूर जिला अस्पताल का रुख करने को विवश हो रहे है। ग्रामीण कहते हैं कि वर्षों से वह यहां पर चिकित्सक या फार्मासिस्ट की तैनाती की मांग उठा रहे हैं, लेकिन उनकी कहीं पर भी सुनवाई नहीं हो रही। आयुर्वेदिक विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार धनी-पखर, दियोथ, माकड़ी, बल्ह-चुराणी और मल्यावर पंचायतों के अस्पताल खाली चल रहे हैं। यहां पर न तो किसी चिकित्सक की तैनाती हो पाई है और न ही फार्मासिस्ट की। ग्रामीण सुनील, देवेंद्र, रजनीश, अर्जुन, कमलजीत ने कहा कि अस्पताल का ग्रामीणों को कोई फायदा नहीं मिल रहा है। छोटी सी बीमारी पर भी ग्रामीण कई किलोमीटर दूर जिला अस्पताल जाने को विवश हो रहे है। उन्होंने विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द इन अस्पतालों में चिकित्सकों की तैनाती की जाए। सिकरोहा में हालत कुछ ऐसे ही बने हुए हैं, वहां पर भी दो दिन फार्मासिस्ट तो दो दिन चिकित्सक वैकल्पिक तौर पर सेवाएं देते है। इस अस्पताल में भी स्थायी तौर पर कोई चिकित्सक और फार्मासिस्ट तैनात नहीं है। पंचायत के उप प्रधान हंस राज ने कहा कि कई साल से ग्रामीण यहां चिकित्सक की स्थायी नियुक्ति की मांग उठा रहे हैं, किंतु कोई सुनवाई नहीं हो रही।
उधर, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी राजेंद्र ठाकुर ने माना कि छह अस्पतालों में स्टाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि स्टाफ की कमी के कारण अन्य अस्पतालों में भी व्यवस्था मुश्किल से की गई है। इस बारे में आलाधिकारियों को पत्राचार किया गया है। जल्द समस्या के समाधान की उम्मीद है।

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