भूस्खलन की रोकथाम पर चरचा

सांगला (किन्नौर)(विशेश्वर नेगी)किन्नौर जिला के एनएच-5 पांगी के पास काशंग पावर प्रोजेक्ट के साथ लगते क्षेत्र में और स्कीबा के पास करीब 100 मीटर मार्ग पर लगातार हो रहे भू-स्खलन के कारणों का पता लगाने के लिए चंडीगढ़ से आए भू-विज्ञानियों की टीम ने शुक्रवार को पांगी गांव का दौरा किया। इसके बाद उपायुक्त ने टीम के साथ बैठक की।
इस टीम में भारत भू-विज्ञान सर्वे के प्रशांत ईलामरेन, वरिष्ठ भू-विज्ञानी एके लक्ष्मणन, भू-विज्ञानी और जीना मंडल भू-विज्ञानी ने शुक्रवार को पांगी गांव का दौरा किया। इस अवसर पर उनके साथ सीमा सड़क संगठन की प्रतिनिधि ओविंग टाकी भी मौजूद थी। सर्वेक्षण दल के सदस्यों ने बताया कि वे दो वर्ष तक जिला किन्नौर के संकट आंचलिक क्षेत्र का अध्ययन करेंगे। यह सर्वेक्षण चंडीगढ़ सेंटर के तहत किया जाएगा। पहली नजर में लोगाें की ओर से किए जा रहे बाढ़, सिचांई कार्य, सड़कों के विस्तारीकरण कार्य में भारी ब्लास्ंिटग, भूमि के प्रयोग में बदलाव सहित अन्य मुख्य कारण हो सकते हैं।
उपायुक्त डीडी शर्मा ने कहा कि अध्ययन में ज्यादा समय लग सकता है। इसलिए यह दल जीएसआई भू-स्खलन क्षेत्र का बार-बार अध्ययन करेगा। बैठक में पांगी में हो रहे भू-स्खलन की रोकथाम के लिए विस्तार से चरचा की गई। बैठक में पूर्व आईएस अधिकारी आरएस नेगी और किन्नौर जागरण मंच के अन्य सदस्य भ्ंाी मौजूद रहे।

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