
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में चरमराई स्वास्थ्य सेवाओं का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। यहां चिकित्सकों सहित अन्य स्टाफ की कमी से मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। वहीं, यहां के अस्पतालों को दी गई अल्ट्रासाउंड मशीनें भी धूल फांक रही हैं। कई वर्ष पहले पूर्व सरकार ने इस क्षेत्र के लोगों की सुविधा के लिए अल्ट्रासाउंड मशीनें तो दे रखीं है, लेकिन रेडियोलॉजिस्टों के न होने से ये मशीनें बेकार साबित हो रही हैं। घाटी की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किसी भी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। खासकर सर्दियों के दिनों में यहां के लोगों को बीमार होने की सूरत में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सरकार ने लाहौल घाटी के क्षेत्रीय अस्पताल केलांग, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उदयपुर, शांशा और स्पीति घाटी के काजा स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड मशीनें तो दी हैं, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती आज तक नहीं की गई है। इसका खामियाजा क्षेत्रवासियों को भुगतना पड़ रहा है। घाटीवासी संजीव, रमेश, राजेश, प्रदीप, संतोष कुमारी, वीना ठाकुर, सरोजनी और पिंकी ने बताया कि लाहौल-स्पीति जिले के मरीजों को अल्ट्रासाउंड की कोई सुविधा नहीं मिल पाती है। इन लोगों का कहना है कि मरीजों को एक अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए हजारों रुपये खर्च कर जिले से बाहर जाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि लाहौल-स्पीति जिले में सेवारत चिकित्सकों को भी सरकार की ओर से कोई खास सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। उधर, खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजीत सिंह वैध ने लाहौल-स्पीति जिले में रेडियोलॉजिस्ट के पद खाली होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इलाके की गंभीर वस्तुस्थिति को देखते हुए जिले में रेडियोलॉजिस्ट का होना जरूरी है।
