मिथक तोड़ेंगे मोदी या बाजी मारेगी सरकार?

शिमला। (वीरेन्द्र खागटा)नरेंद्र मोदी क्या हिमाचल में लोकसभा चुनाव से जुड़ा एक मिथक तोड़ेंगे? मिथक ये कि हिमाचल में जिस दल की सरकार होती है, उसी को लोकसभा में भी बढ़त मिलती है। राज्य में सत्ता में लौटी कांग्रेस सरकार को सवा साल ही हुआ है। ऐसे में क्या इस बार भी बाजी सरकार मारेगी या मोदी लहर का जादू चलेगा? भाजपा के दावों और मोदी लहर की असल परीक्षा दरअसल हिमाचल में ही होगी। लोकसभा चुनाव से पहले के एग्जिट पोल ने राज्य में भाजपा को 4-0 से जीत दी थी। इसे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने तुरंत खारिज कर दिया था।
हिमाचल में 1971 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। इसके बाद के चुनावी नतीजे बताते हैं कि हिमाचल के मतदाता जिस दल को राज्य में सत्ता सौंपते हैं, लोकसभा में भी उसी का साथ देते हैं। फिर चाहे राष्ट्रीय मुद्दे भिन्न हों। 1971 में राज्य में कांग्रेस की सरकार थी और डा. वाईएस परमार मुख्यमंत्री। लोकसभा चुनाव में 4-0 से कांग्रेस जीती। 1977 में राज्य में जनता पार्टी सरकार में शांता कुमार मुख्यमंत्री थे और जनता पार्टी ने 4-0 से कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में पटखनी दी। 1980 में लोकसभा चुनाव से पहले यहां कांग्रेस के ठाकुर रामलाल सीएम थे। आम चुनाव का नतीजा भी 4-0 से कांग्रेस के पक्ष में रहा।
1983 में जब वीरभद्र सिंह पहली बार मुख्यमंत्री बने तो 1984 के चुनाव में कांग्रेस ने क्लीन स्वीप किया। 1989 में राज्य में कांग्रेस सरकार जाने वाली थी। 1990 मेें राज्य में भाजपा के शांता कुमार दूसरी बार सीएम बने। इससे ठीक पहले हुए 1989 के लोस चुनाव में भाजपा ने ही 3-1 से मुकाबला जीता। हालांकि, 1991 के चुनाव में 2-2 से मैच टाई रहा। 1993 में वीरभद्र सिंह कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री बने और इसके बाद 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने चारों सीटें जीतीं। इस चुनाव में तो हमीरपुर सीट पर प्रेम कुमार धूमल भी मेजर जनरल विक्रम सिंह से चुनाव हार गए थे। 1998 में धूमल ने हिविकां के सुखराम के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनाई तो कांग्रेस की परंपरागत शिमला सीट को भी कांग्रेस से पहली बार छीना। इसी चुनाव में कौल सिंह मंडी सीट पर हारे। 2003 में कांग्रेस सत्ता में लौटी और वीरभद्र सीएम बने। एक साल बाद 2004 में लोकसभा चुनाव हुए तो हमीरपुर को छोड़ भाजपा तीनों सीटें हार गई। इस चुनाव में शांता कुमार को भी हार का मुंह देखना पड़ा। इसी प्रकार 2007 में जब धूमल दोबारा सीएम बने तो 2009 में हुए लोस चुनाव में 4 में से 3 सीटें भाजपा के हाथ लगीं। मंडी में केवल वीरभद्र सीट बचा पाए थे।
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क्या कहते हैं राजनीतिक दल
कोट-1
हिमाचल में कांग्रेस इस बार चारों सीटें जीतेगी। मोदी की लहर जैसी कोई चीज यहां नहीं है। यूपीए सरकार ने दिल खोलकर हिमाचल की मदद की है। कांग्रेस की सरकार बनने के बाद विकास का एक नया युग प्रदेश में शुरू हुआ है।
– सुखविंदर सुक्खू, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस।
कोट-2
लोकसभा चुनाव में इस बार स्थितियां बदली हुई हैं। यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार-महंगाई के कारण नरेंद्र मोदी चुनाव से पहले ही देश के नेता बन गए हैं। राज्य सरकार ने सवा साल में कुछ नहीं किया। हम कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर देंगे।
– सतपाल सत्ती, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा।

 

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