
धर्मशाला(आत्मा राम) जाट कल्याण परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आरसी रघवा ने कहा कि जाटों के ओबीसी की केंद्रीय सूची में आने से समुदाय के छात्रों को पढ़ाई और नौकरी करने में सुविधा मिलेगी। साथ ही प्रशासनिक परीक्षाएं उत्तीर्ण कर नौकरी करने का मौका भी मिलेगा। उन्होंने यूपीए सरकार का जाटों को ओबीसी केंद्रीय सूची में शामिल करने पर आभार जताया है। 16 नवंबर, 2002 को भाजपा सरकार ने जाटों को ओबीसी सूची में शामिल करने की कवायद शुरू की थी। इसे लेकर 2005 में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में सम्मेलन भी हुआ था। इस मांग को केंद्र सरकार के समक्ष रखा गया था। उन्हाेंने कहा कि कमीशन ऑफ ओबीसी ने भी सिफारिश की थी। प्रदेश भर में डेढ़ लाख इस समुदाय से संबंधित लोग रहते हैं।
जाटों को ओबीसी केंद्रीय सूची में शामिल करने पर जाट कल्याण परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि इससे बेरोजगारी कम होगी, वहीं अब समय पर बेरोजगारों को रोजगार भी मिल सकेगा। इतना ही नहीं कम पढ़े लिखे लोग लोन लेकर भी अपना व्यवसाय स्थापित कर सकेंगे।
पढ़ाई होगी और सस्ती
जाट कल्याण परिषद के कांगड़ा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम सिंह ने कहा कि ओबीसी सूची में शामिल होने से छात्रों को पढ़ाई करने में सुविधा मिलेगी। पढ़ाई करना अब और सस्ता हो जाएगा।
बेरोजगारी होगी अब कम
महासचिव कृपाल सिंह संधु ने कहा कि केंद्र सरकार ने जाटों को ओबीसी का दर्जा दिया है। इसके लिए समुदाय केंद्र सरकार का आभार जताता है। छात्र प्रशासनिक परीक्षाएं भी उत्तीर्ण कर पाएंगे। साथ ही बेरोजगारी भी कम होगी।
केंद्र की योजनाओं का मिलेगा लाभ
मुख्य सलाहकार राजेंद्र सिंह वर्मा ने कहा कि पहले छात्रों को पढ़ाई और कोर्स करने में छूट नहीं मिल रही थी। ओबीसी सूची में शामिल होने से छात्रों को कोर्स करने में भी सुविधा मिलेगी। साथ ही लोगों को केंद्र की योजनाओं का लाभ भी मिलेगा।
लोग होंगे लाभान्वित
जाट कल्याण परिषद के संस्थापक रविंद्र सिंह ने मांग पूरी होने पर केंद्र सरकार का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि समुदाय के लोगों को योजनाओं का भी लाभ मिल सकेगा। सेना भर्ती में भी युवाओं को आरक्षण मिलेगा।
बेरोजगाराें को मिलेगी नौकरी
पूर्व सचिव जेएस संधु ने कहा कि ओबीसी सूची में शामिल होने से समुदाय के बेरोजगार लोगों को नौकरी मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि आरक्षण न होने के कारण बेरोजगारों की तादाद बढ़ती जा रही थी।
