जंगलों में हुए काम की होगी पड़ताल

शिमला।(वीरेन्द्र खागटा)  हिमाचल प्रदेश के जंगलों में कैंपा (प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं नियोजन प्राधिकरण) के तहत जमीनी काम कराए गए या नहीं, इसकी पड़ताल अब थर्ड पार्टी से कराई जाएगी। इसके तहत पिछले पांच साल में पूरे प्रदेश में कराए गए लगभग 167 करोड़ रुपये के कार्यों की बारीकी से छानबीन होगी। देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) से यह जांच कराने को लेकर बात की जा रही है। इसकी पुष्टि अपर प्रमुख वन संरक्षक कैंपा एसएस नेगी ने की। नेगी ने बताया कि जल्द ही एफआरआई के साथ समझौता भी हो जाएगा। एफआरआई की ओर से पंजाब में कैंपा के तहत कराए गए कार्यों की थर्ड पार्टी जांच कर चुकी है। इसी को ध्यान में रखकर हिमाचल प्रदेश ने भी कैंपा के कार्यों की जांच एफआरआई से कराने निर्णय लिया गया है।

अब तक क्या था प्रावधान
अब तक कैंपा के कार्यों की जांच ग्राउंड लेबल पर नहीं हो पाई है। केवल कागजों में ही इंटरनल आडिट किया गया है। ऐसे में अगर ग्राउंड लेबल पर कार्यों की जांच की जाएगी तो पूरी तसवीर उभरकर सामने आ पाएगी। किस तरह से कैंपा के बजट को खपाया जा रहा या फिर उसका ठीक से इस्तेमाल किया जा रहा है। कई राज्यों में कैंपा के कार्यों में गड़बडि़यां सामने आ चुकी हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में थर्ड पार्टी जांच में खामियां सामने आई थीं।

क्या है कैंपा
देश भर में होने वाले विकास कार्यों के नाम पर हरे पेड़ों का कटान किया जाता है। इसकी प्रतिपूर्ति में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दो दशक पहले एक फंड बनाया गया था, जिसका नाम कैंपा दिया गया। देश के हर राज्यों की ओर से विकास के नाम पर कटने वाले पेड़ों की प्रतिपूर्ति में एक खास रकम जमा की जा रही थी। उसी रकम को अब किस्तों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2009 से प्रत्येक राज्यों को हरियाली बनाए रखने और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए दिया जा रहा है।

कैंपा के तहत हिमाचल में कराए कार्य
वित्तीय वर्ष काम (करोड़ में )
2009-10 1.35
2010-11 37.08
2011-12 41.55
2012-13 47.24
2013-14 39.78 (31 दिसंबर 2013 तक)
कुल 167.00 करोड़

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