
शिमला। (वीरेन्द्र खागटा ) आपके घर के पास कौन सी ऐसी औषधीय वनस्पति है, जिससे बीमारियां ठीक हो जाती हैं। कौन-कौन से ऐसे कीड़े मकोड़े हैं, जो खेती के लिए लाभदायक होते हैं। कौन से ऐसे दुर्लभ जीव हैं, जो विलुप्त हो रहे हैं। वनस्पतियों, कीड़े मकड़ों और वन्यजीवों की हर प्रजातियों की सूची हिमाचल प्रदेश में पंचायत स्तर पर तैयार की जाएगी। इसके लिए बुजुर्गों की भी मदद ली जाएगी, जिससे प्रदेश की जैव विविधता को संरक्षण करने में मदद मिल सके । साथ ही भविष्य में अनुसंधान करने में भी आसानी हो। इसके लिए हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड की ओर से सरकारी और गैर सरकारी एक्सपर्ट एजेंसियों, समितियों और संगठनों से 10 मार्च 2014 तक आवेदन मंगवाए गए है।
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने 2012 में ही सभी राज्यों को निर्देश दिए थे कि पंचायत स्तर पर ‘पीपल जैव विविधता रजिस्टर’ बनाया जाए, जिससे जलवायु परिवर्तन के कारण नष्ट हो रही प्रजातियों को बचाया जा सकें। इस दिशा में हिमाचल प्रदेश अब तक पिछड़ रहा है। बोर्ड से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से बजट न मिल पाने के कारण पीपल रजिस्टर बनाने की दिशा में काम नहीं किया जा रहा था। अब केंद्र से बजट मिल चुका है। इसको ध्यान में रखते हुए राज्य के हर पंचायत स्तर पर पीपल रजिस्टर बनाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके लिए 10 मार्च तक एक्सपर्ट एजेंसियों से आवेदन मंगाए गए हैं, जिनके माध्यम से पंचायत स्तर पर सभी तरह की वनस्पतियों, वन्यजीवों और कीड़े मकोड़ों को रजिस्टर में सूचीबद्ध किया जा सके। इस काम में गांव के बुजुर्ग व्यक्तियों की सबसे अहम भूमिका होगी। क्योंकि, उन्हें परंपरागत वनस्पतियों के लाभ और हानि दोनों के बारे में पता है। इस रजिस्टर के जरिये छात्रों को रिसर्च करने में आसानी होगी।
कोट —
अगले दो से तीन साल में प्रदेश भर में सभी प्रजातियों को सूचीबद्ध करने की उम्मीद है। यह रजिस्टर भविष्य के लिए बेहद लाभदायक होगा। जैव विविधता को संरक्षण करने से लेकर परंपरागत औषधियों का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। -डा.एसएस नेगी, निदेशक पर्यावरण एवं विज्ञान तकनीकी विभाग
