पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल लाइन को रेड सिगनल

चौंतड़ा (मंडी)। पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलवे लाइन को इस बार भी रेल बजट में महत्व ने देने से इस रेल ट्रैक के अस्तित्व को झटका लगा है। इस रेल लाइन को लंबे अरसे से ब्राडगेज होने का इंतजार है, लेकिन हर बार केंद्रीय रेल बजट में इसकी अनदेखी ही होती रही है।
इस रेल ट्रैक को ब्राडगेज करने की मांग प्रदेश की सरकारों ने कई बार रेल मंत्रालय के समक्ष रखी। पठानकोट (पंजाब )से कांगड़ा होते जोगिंद्रनगर तक पहुंचने वाले 120 किलोमीटर लंबी दूरी वाली इस रेल लाइन को आज तक ब्राडगेज नहीं किया गया है और न ही जोगिंद्रनगर से आगे रेल लाइन का विस्तार हो पाया है। प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल लाइन की उपेक्षा करना पर्यटन और अन्य व्यवसायों के लिए धक्का है। रेल लाइन के ब्राडगेज होने से प्रदेश में पर्यटन, उद्योग और व्यवसाय को प्रगति मिलेगी। धर्मशाला में निर्वासित तिब्बत सरकार की राजधानी, धर्मशाला में अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट मैदान, विश्व विख्यात ब्रजेश्वरी, चांमुडा देवी, बाबा बालक नाथ मंदिर, ज्वालाजी, चिंतपूर्णी, बाबा बैजनाथ, शानन बिजली घर और जिला कांगडा, मंडी और कूल्लू में कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण स्थल हैं। वर्ष 1932 में यह रेल लाइन बनकर तैयार हुई थी। कर्नल बैटी ने शानन बिजली प्रोजेक्ट के लिए भारी मशीनरी और उपकरणों को उस समय इस रेल मार्ग के माध्यम से जोगिंद्रनगर पहुंचाया था। आज भी यह रेल लाइन नैरोगेज ही है।

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