कश्ती की सवारी कर सब्र कर रहे सैलानी

नगरोटा सूरियां (कांगड़ा)। रामसर साइट वैटलैंड पौंग झील के बीच रेंसर का कुदरती नजारा सैलानियों की पहुंच से बाहर हो गया है। मोटर बोट से 100 रुपये प्रति सवारी लेकर पौंग झील में स्थित रेंसर टापू पहुंचाने की वन्य प्राणी विभाग की घोषणा भी दम तोड़ चुकी है। पौंग झील का नजारा देखने आए सैलानियों को मजबूरन मछुआरों की कश्ती में ही वोटिंग कर संतोष करना पड़ रहा है। कहने को विभाग के पास मोटर बोट तो सात हैं, लेकिन बोट मेन एक ही है। अब वह बोट मैन विभागीय अधिकारियों को पौंग झील में सैर करवाए या फिर सैलानियों को? नतीजतन पौंग झील की सैर करने आए सैलानियों और पक्षी प्रेमियों को निराश होकर दूर से ही झील का नजारा देख कर वापस लौटना पड़ रहा है। सूत्रों की मानें तो विभाग के पास चालू हालत में एक ही बोट है। अन्य छह बोट शोपीस की तरह पौंग के किनारे खड़ी दम तोड़ रही हैं। इतना ही नहीं विभाग के पास बोट मैन भी एक ही है। शायद यही कारण है कि अन्य बोट खड़ी-खड़ी ही बेकार हो रही हैं। प्रदेश सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर सात बोट खरीदी हैं। इनमें से दो फाइबर बोट 2013 में खरीदी गईं और वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने इनका लोकार्पण किया था। लेकिन, मौजूदा समय में ये बोट शोपीस बनकर रह गई हैं।

दावे बड़े-बड़े, हकीकत कुछ और
एसएस गुलेरिया ने हैरानी जताई कि पौंग झील में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए प्रदेश सरकार योजना बनाकर दावे तो बड़े-बड़े कर रही है, लेकिन सैलानियों की आकर्षण स्थली रेंसर और कारू टापू मोटर बोट के अभाव में पहुंच से दूर हो गए हैं।

बोट मैन एक होने से दिक्कत
डीएफओ सुभाष पराशर ने माना कि वन्य प्राणी विभाग के पास दो बड़ी मोटर बोट, तीन पेडल बोट और दो फाइबर बोट हैं। लेकिन, बोट मैन एक ही होने के कारण ऐसी दिक्कत आ रही है।

Related posts