सुरंग बनने से सालभर कांगड़ा से जुड़ा रहेगा भरमौर

धर्मशाला। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि कांगड़ा-होली सुरंग का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। इससे खासकर भरमौर क्षेत्र के जनजातीय लोगों को वर्ष भर आवाजाही की सुविधा उपलब्ध होगी। सीतलु नाग मंदिर, सती माता मंदिर कढ़ा तथा नडाल क्षेत्र के किलका माता मंदिर व प्राचीन शिव मंदिर को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। सीएम वीरवार को प्रदेश गद्दी कल्याण बोर्ड की धर्मशाला में हुई 14वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के बेरोजगार युवाओं को राज्य हस्तशिल्प तथा हथकरघा निगम द्वारा हस्तशिल्प एवं हथकरघा उद्यम के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हाेंने शिक्षा विभाग को भरमौर क्षेत्र की ग्राम पंचायत चांदपुर में राजकीय प्राथमिक पाठशाला, कुलानी को पुन: खोलने के निर्देश दिए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए कि बैजनाथ विधानसभा क्षेत्र में हरेड़-फटेहर वाया तारस मार्ग पर पुल का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 670 जनजातीय बहुल बस्तियां चिन्हित की हैं। इनमें 480 बस्तियां चंबा तथा कांगड़ा जिले में हैं। जिन गांवों में जनजातीय लोगों की जनसंख्या 40 प्रतिशत से अधिक है, उन्हें राज्य योजना के अतिरिक्त विशेष केंद्रीय सहायता प्रदान की जा रही है।
वीरभद्र सिंह ने कहा कि 450 लाख रुपये सड़क निर्माण पर, 125 लाख रुपये सिंचाई एवं पेयजल आपूर्ति योजनाओं, 157 लाख रुपये कृषि, 95 लाख रुपये बागवानी, 89 लाख रुपये पशुपालन तथा 72ल़ाख रुपये सामुदायिक भवनों के निर्माण पर व्यय किए जाएंगे। चंबा जिला के सिहूंता तथा कांगड़ा जिला के दाड़ी में जनजातीय भवनों के निर्माण का कार्य शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा।

बोले वन मंत्री भरमौरी
वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने कहा कि प्रदेश में सभी क्षेत्रों विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कुशल नेतृत्व में अपार विकास सुनिश्चित हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार हमेशा ही जनजातीय तथा दूरदराज क्षेत्रों के प्रति संवेदनशील रही है।

इन मुद्दों पर हुई चर्चा
बैठक में सड़क निर्माण, जलापूर्ति, स्वास्थ्य केंद्र, विश्राम गृह और बैंक शाखाएं, जनजातीय छात्रावास खोलने, सौर लाइट लगाने, भेड़ पालकों के लिए रैन बसेरे बनाने, आंगनबाड़ी केन्द्र, जन शौचालय खोलने, बंदूक लाइसेंस जारी करने एवं उनका नवीकरण करने, शिप डिप टैंक, भेड़ पालकों को परमिट जारी करने के संबंध में नीति तैयार करने, ऊन कातने की मशीनें उपलब्ध करवाने, भरमौर क्षेत्र के धनछो में सराय का निर्माण करने, भेड़-बकरियों की चोरी पर रोक लगाने, भेड़ पालकों को टैंट उपलब्ध करवाने, भेड़-बकरियों की खरीद पर उपदान उपलब्ध करवाने और ऊन के समर्थन मूल्य में वृद्धि इत्यादि विषय पर विस्तार से चर्चा की गई।

Related posts