
मंडी। बैंक की सेवाओं में कमी देखते हुए जिला उपभोक्ता फोरम ने उपभोक्ता के पक्ष में 4000 रुपये बतौर हर्जाना अदा करने का फैसला सुनाया। इसके अलावा बैंक को उपभोक्ता के पक्ष में 2000 रुपये शिकायत व्यय भी अदा करना होगा। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष जेएन यादव और सदस्य रमा वर्मा ने सदर तहसील के दौंधी स्थित हाउसिंग बोर्ड कालोनी निवासी नंद लाल अरोड़ा पुत्र तारा चंद अरोड़ा की शिकायत को उचित मानते हुए यूको बैंक की स्कूल बाजार शाखा के प्रभारी, धर्मशाला के श्याम नगर स्थित जोनल कार्यालय के जोनल प्रबंधक और कोलकाता के साल्ट लेक सिटी स्थित मुख्यालय के प्रबंध निदेशक को संयुक्त रूप से उपभोक्ता के पक्ष में उक्त हर्जाना राशि अदा करने के आदेश दिए। फोरम में अपनी शिकायत की पैरवी खुद करते हुए उपभोक्ता नंद लाल अरोड़ा का कहना था कि उन्होंने अपनी 10,000 रुपये की फिक्स डिपोजिट रसीद (एफडीआर) फरवरी 2011 में बैंक के पास रिन्यू (नवीनीकरण) के लिए दी थी, लेकिन बैंक ने इसका नवीनीकरण नहीं किया। उपभोक्ता का कहना था कि वह हृदय रोगी हैं और इन दिनों अखिल भारतीय मेडिकल साइंस संस्थान (एम्स) में उपचाराधीन हैं। उनका कहना था कि कई बार बैंक को प्रार्थना करने के बाद एफडीआर के नवीनीकरण के लिए उन्होंने कानूनी नोटिस भी दिया था, लेकिन बैंक के कार्यवाही न करने पर उन्होंने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करवाई थी। फोरम ने अपने फैसले में कहा कि बैंक ने यह माना है कि जून 2012 में उपभोक्ता एफडीआर के नवीनीकरण के लिए बैंक आया था, लेकिन उनके पास पहचान से संबंधित दस्तावेज न होने के कारण नवीनीकरण नहीं हो सका था। फोरम ने कहा कि बैंक ने नवीनीकरण के कार्य में करीब एक साल की देरी की और जून 2013 में उपभोक्ता को राशि मिल सकी। जहां तक उपभोक्ता की पहचान का सवाल था तो एफडीआर में साफ दर्शाया गया है कि उपभोक्ता ही इसके अभिभावक हैं। ऐसे में फोरम ने बैंक के एफडीआर नवीनीकरण में देरी को सेवाओं में कमी करार देते हुए उक्त हर्जाना राशि और शिकायत व्यय अदा करने का फैसला सुनाया।
