करोड़ों की जमीनों पर सेना की नजर

नूरपुर (कांगड़ा)। बात निकली है तो फिर दूर तक जाएगी…? भले ही नूरपुर में प्रस्तावित क्रिकेट स्टेडियम की जमीन को लेकर बवाल कागजी दस्तावेजों की तस्दीक से फिलहाल ठंडा पड़ गया है, लेकिन स्टेडियम के अलावा इसकी बगल में करीब दस हजार वर्ग मीटर जमीन पर सेना की दावेदारी से अब नया बखेड़ा खड़ा हो गया है। सूत्रों की मानें तो जिला कांगड़ा में नूरपुर समेत कोटला और शाहपुर में सेना ने नेशनल हाईवे के किनारे अपनी करोड़ों की जमीन को दोबारा कब्जे में लेने की कागजी कसरत तेज कर दी है। इसी के चलते सेना की 26 पंजाब रेजिमेंट के अधिकारी सैन्य रिकॉर्ड के तहत जिला कांगड़ा में अपनी कैंपिंग साइट (जमीनों) को चिन्हित करने के बाद इनके राजस्व संबंधी दस्तावेजों को खंगालने में लगे हैं। माना जा रहा है कि सेना की तरफ से देर-सवेर इन करोड़ों की जमीन पर दोबारा अपना कब्जा जमाने की कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है। सूत्र बताते हैं कि सेना ने नूरपुर प्रशासन से चौगान में प्रस्तावित स्टेडियम की जमीन के ठीक सामने उनकी जमीन पर बनी आईपीएच विभाग की कालोनी के भूमि हस्तांतरण से जुड़े कागजी दस्तावेज मांगे हैं, वहीं कोटला में सेना के कैंपिंग साइट की जद में आने वाले मैदान के आसपास अवैध कब्जों और शाहपुर में सेना की जमीन पर सरकारी इमारतों के निर्माण को लेकर कड़ा रुख कर लिया है। फिलहाल सैन्य अधिकारी नूरपुर समेत कोटला ग्राउंड पर अवैध कब्जों और शाहपुर में सेना की जमीन पर रेस्ट हाउस और सरकारी इमारतों के निर्माण तथा भूमि हस्तांतरण से जुड़े तमाम सरकारी दस्तावेजों को जुटाने में लगे हैं। वहीं, नूरपुर प्रशासन भी स्टेडियम के बाद अब आईपीएच कालोनी की जमीन के राजस्व रिकार्ड से जुड़ी सालों पुरानी फाइलों को खंगालने में जुट गया है।
उधर, एसडीएम नूरपुर अश्वनी कुमार की मानें तो सेना की स्टेडियम की जमीन के अलावा दस हजार वर्ग मीटर जमीन पर दावेदारी के चलते राजस्व विभाग के फील्ड स्टाफ को पुराना रिकॉर्ड खंगालने और वस्तुस्थिति की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
इधर, सेना के एक अधिकारी कहते हैं कि नूरपुर के एसडीएम से सैन्य अधिकारियों ने बातचीत की है। बातचीत के दौरान जमीन की डिमार्केशन के लिए कहा गया है। जहां-जहां सेना की जमीन निकलेगी, उसे अपने अधिकार क्षेत्र में लिया जाएगा। उस जमीन को सैन्य गतिविधियों के लिए प्रयोग में लाया जाएगा।

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