सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे कारोबारी

शिमला/ऊना। हिमाचल में 26 जनवरी से पॉलीथिन पैक्ड खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध के विरोध में प्रदेश और शिमला व्यापार मंडल सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगा। हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में व्यापारियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला लिया है। प्रदेश व्यापार मंडल के प्रधान मदन लाल खुराना और शिमला व्यापार मंडल के प्रधान इंद्रजीत सिंह ने बताया कि शनिवार को कार्यकारी अध्यक्ष सुमेश शर्मा के नेतृत्व में हिमाचल के व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली रवाना हुआ। रविवार को पदाधिकारी सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के साथ आगामी रणनीति बनाएंगे।
प्रदेश व्यापार मंडल के अध्यक्ष मदन लाल खुराना ने बताया कि कोर्ट के इस फैसले से व्यापारी पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगे। व्यापारियों की आज जो दशा है, वह अंग्रेजों के समय से भी बदतर है। अंग्रेजों के समय में अंग्रेज अधिक लगान देने वाले व्यापारी को अधिमान देते थे लेकिन, अब जो भी सरकारें आई हैं वह व्यापारियों को लुटेरा समझती हैं। प्रदेश में व्यापारी वर्ग ही सबसे अधिक राजस्व सरकार के खजाने में भर रहा है, इसके बावजूद व्यापारियों का कोई भविष्य नहीं है। शिमला व्यापार मंडल के प्रधान इंद्रजीत सिंह का कहना है कि हिमाचल जैसे राज्य में पॉलीथिन पैकिंग पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकती है। यहां की भौगोलिक स्थिति के अनुसार अन्य पैकिंग में सामान जल्द खराब हो जाएगा। बड़ी-बड़ी कंपनियां हिमाचल के लिए अपनी पैकिंग नहीं बदलेंगी। इससे हजारों लोगों का कारोबार समाप्त हो जाएगा।
कार्यकारी अध्यक्ष सुमेश शर्मा ने कहा कि पॉलीथिन पैकिंग प्रतिबंध के विरुद्ध कानूनी लड़ाई लड़ने के साथ-साथ यदि जरूरत पड़ी, तो सड़कों पर भी उतरा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को भी अपना रुख साफ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने में व्यापारी भी पूर्ण सहयोग दे रहे हैं, लेकिन रोेजी रोटी के बंद होने से हिमाचल के लाखों परिवार सड़काें पर आ जाएंगे।

व्यापारी जो दिल्ली हुए रवाना
हिमाचल प्रदेश व्यापार मंडल की तरफ से दिल्ली में याचिका दायर करने के लिए कार्यकारी अध्यक्ष सुमेश शर्मा के नेतृत्व में शिमला के प्रधान इंद्रजीत, मनाली के महासचिव सुदर्शन व हिमाचल प्रदेश थोक विक्रेता एलाइंस के राजेंद्र सूद ऊना से दिल्ली के लिए रवाना हुए। अब पॉलीथिन पैकिंग के प्रतिबंध पर व्यापारियों की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर रहेंगी।

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