बिना पंजीकरण बिक रहा स्प्रे ऑयल

शिमला। पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर में सेब मेें इस्तेमाल होने वाले स्प्रे ऑयल की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है, लेकिन हिमाचल में इसे धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं रजिस्ट्रेशन कमेटी में इसका पंजीकरण नहीं होने के बावजूद इस स्प्रे ऑयल को बेखौफ बेचा जा रहा है। इसकी बिक्री पर कोई भी रोक-टोक नहीं लगाई जा सकी है।
भले ही कुछ नामी कंपनियों की ओर से बेचे जा रहे इस स्प्रे ऑयल मेें गुणवत्ता के स्तर पर कोई खामी नहीं होती है। इसके बावजूद केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड में सेब की फसल के लिए इसका पंजीकरण होने के बाद ही इसे बेचा जा सकता है। सेब की फसल पर प्रयोग के बाद इसका पंजीकरण संभव है। अभी तक ऐसा कोई प्रयोग नहीं किया गया है। खास यह है कि कीटनाशक अधिनियम 1968 के शेड्यूल 3 (ई) में स्प्रे ऑयल को भी शामिल किया गया है। इसके लिए सेब की फसल को लेकर स्प्रे ऑयल के निर्माण और विक्रय दोनों के ही लाइसेंस का होना जरूरी है। निर्माण का लाइसेंस केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड देता है, तो राज्य के भीतर विक्रय का लाइसेंस राज्य कृषि विभाग देता है। पर स्प्रे ऑयल के सेब की फसल पर इस्तेमाल को लेकर न तो बोर्ड ने ही लाइसेंस दिए हैं और न ही प्रदेश में राज्य कृषि विभाग की ओर से ही इनकी बिक्री के लाइसेंस जारी किए गए हैं। जम्मू-कश्मीर में तो बिना लाइसेंस के स्प्रे ऑयल बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा चुकी है। चार जनवरी 2014 को तो जम्मू-कश्मीर सरकार के कृषि निदेशक एवं नियंत्रक कीटनाशक ने स्प्रे ऑयल के सभी निर्माताओं, वितरकों और डीलरों को नोटिस जारी किया है कि वे इसे तब तक न बेचें, जब तक उनके पास लाइसेंस नहीं होगा।

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