
मंडी। परचून फल एवं सब्जी विक्रेताओं ने वेस्टेज खर्चे को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने की मांग की है। यूनियन ने इस बाबत बुधवार को एडीएम को ज्ञापन भी सौंपा है। बुधवार को परचून फल एवं सब्जी विक्रेता तथा रेहड़ी-फड़ी वर्कर्स यूनियन की जिला इकाई ने बैठक कर इस बाबत चरचा भी की। बैठक की अध्यक्षता देशराज राणा और सुरेंद्र कुमार ने की। बैठक में सीटू जिला प्रधान भूपेंद्र सिंह और किसानसभा के जिला सचिव कुशाल भारद्वाज सहित यूनियन जिला कमेटी के सदस्य मौजूद रहे।
यूनियन का मानना है कि सब्जियों को बेचती बार उसकी कांटछांट और साफ सफाई के चलते विक्रेताओं को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। इसमें भार 20 से लेकर 35 प्रतिशत तक रह जाता है। बरसात और गर्मियाें में वेस्टेज ज्यादा रहती है। प्रशासन ने यह खर्चा केवल दस प्रतिशत ही तय किया है। इसके अलावा विक्रेताओं को दस फीसदी मार्केट फीस, ट्रांस्पोर्ट खर्चा और मजदूरी भी देनी पड़ती है। लिहाजा ऐसे में वेस्टेज तीस फीसदी की जानी चाहिए। करसोग, जोगिंद्रनगर, सरकाघाट, गोहर, बालीचौकी, पधर और जिले के अन्य क्षेत्रों के लिए जहां ट्रांस्पोर्ट का खर्चा अधिक रहता है वहां की वेस्टेज दर और अधिक होनी चाहिए। इसके अलावा रेहड़ी-फड़ी वालों के लिए बने स्ट्रीट वैंडर्ज कानून-2013 के तहत सुंदरनगर, सरकाघाट, जोगिंद्रनगर, नेरचौक, गोहर, पंडोह, पधर और करसोग टाउन वैंडिंग कमेटियां गठित होनी चाहिए। 21 जनवरी को मंडी जिले के समस्त रेहड़ी फड़ी वाले मंडी में अधिकार रैली निकालेंगे। इसी दिन राज्य स्तरीय बैठक भी होगी। बैठक में हुक्म चंद, सूरज राणा, पधर से चमन लाल, गोहर से प्रकाश चंद, चद्रंमणी, नेरचौक से धनजंय , सुखराम, जोगिंद्रनगर से घनश्याम, राजू वालिया, सरकाघाट से सुरेश, सुरेंद्र कुमार और मंडी से प्रवीण कुमार तथा राकेश कुमार ने भाग लिया।
