
डलहौजी(चंबा)। नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले मोती टिब्बा में बिना अनुमति ओक के हरे भरे पेड़ काटने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में सोमवार को नगर परिषद ने आगामी कार्रवाई के लिए न्यायालय की शरण ली है। नगर परिषद के अनुसार न तो पुलिस विभाग ने उनकी सुनी और न ही वन विभाग को बताए जाने पर कोई कार्रवाई की गई है। गौरतलब है कि मोती टिब्बा में बिना अनुमति के पांच संरक्षित प्रजाति के हरे भरे ओक के पेड़ों को भू मालिकों ने बिना अनुमति काट डाला था। पहले तो विभाग एक-दूसरे पर बात डाल कर अपना अपना पल्लू झाड़ते रहे, लेकिन जब मामले ने तूल पकड़ा तो नगर परिषद को इस मामले में नोटिस निकालना पड़ा। नप अब आगामी कार्रवाई के लिए न्यायालय की शरण ले रही है। बताया जा रहा है कि इस निजी प्रोजेक्ट में कई नामी गिरामी लोग शामिल हैं, जिसके निर्माण के चलते ये पेड़ काटे गए हैं। नप कार्यकारी अधिकारी राखी कौशल ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा की मोती टिब्बा के फेयर व्यू एस्टेट में बिना अनुमति के पांच हरे भरे पेड़ों को काटा गया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस को भी सूचित किया गया था, लेकिन उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया। फिर वन विभाग को भी अवगत करवाया गया, मगर वन विभाग ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। आखिरकार नप को ही इस मामले में न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
अधिकारी कहते हैं…
डलहौज़ी के डीएफओ आर गोमा का कहना है कि यह मामला नप के अंतर्गत आता है। नप ही इस पर एक्शन ले सकती है। डीएसपी रमन शर्मा का कहना है कि यह पेड़ निजी जमीन में काटे गए हैं। इस मामले में संबंधित विभाग ही कार्रवाई कर सकते हैं। सरकारी भूमि पर पेड़ कटने पर ही पुलिस कार्रवाई करती है।
