
शिमला। हिमाचल में सिंचाई योजनाओं को पंचायतों के हवाले करने की तैयारी है। आईपीएच विभाग ने यह निर्णय उन योजनाओं को लेकर लिया है, जिन्हें पूरा किया जा चुका है मगर पंचायतें और कृषक संघ इनकी देखरेख नहीं कर रहे हैं। यह मामला विधायक प्राथमिकता की इरिगेशन योजनाओं से संबंधित है। अतिरिक्त मुख्य सचिव सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विनीत चौधरी ने विभाग के प्रमुख अभियंता, सभी मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण अभियंताओं और अधिशासी अभियंताओं को पत्र लिखकर कहा है कि संबंधित पंचायतें पूरी की जा चुकी योजनाओं को टेकओवर करने में लेटलतीफी कर रही हैं। इसीलिए भविष्य में सिंचाई योजनाओं के संचालन और मरम्मत को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएं। इन योजनाओं को लेकर उन किसानों और स्थानीय लोगों में मालिकाना सोच विकसित की जाए, जो विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में शामिल किए गए हैं।
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आउटसोर्सिंग का निर्णय अटका
पीने के पानी सहित तमाम जलापूर्ति योजनाओं की संचालन और मानीटरिंग आउटसोर्स करने का निर्णय फिलहाल अटक गया है। इस बारे में एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मांगे गए थे। ये खोल दिए गए हैं, पर अभी निर्णय नहीं लिया गया।
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सरकार ने निर्णय लिया है कि आईपीएच विभाग और सिंचाई योजनाओं से संबंधित पंचायतों के बीच एमओयू साइन होंगे। इसके बाद इनकी ऑपरेशन और मानीटरिंग की जिम्मेदारी पंचायतों की होगी। जहां तक योजनाओं को आउटसोर्स करने की बात है तो शायद यह प्रावधान अब पीने के पानी की जलापूर्ति योजनाओं के लिए रहेगा। इसके एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट के तहत आए पत्र भी खोले गए हैं। इस पर अभी निर्णय नहीं हुआ।’
– आरके शर्मा, प्रमुख अभियंता, राज्य सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य, हिमाचल प्रदेश।
