
मंडी। प्रदेश में लागू नए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के तहत स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को लाइसेंस बनाने होंगे। बगैर लाइसेंस के कोई भी खाद्य पदार्थ नहीं परोसा जा सकता। चार फरवरी के बाद यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। जिले में हजारों स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र अभी ऐसे हैं जिन्होंने लाइसेंस बनवाने को आवेदन तक नहीं किए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के निर्देशाें पर न तो स्कूल और केंद्र तथा न ही संबंधित विभाग गौर कर रहे हैं। स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र लाइसेंस बनाने में ढील बरत रहे हैं। एक माह का समय शेष है। इसके बाद यह ढील भारी पड़ सकती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस न होेने पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
प्रदेश के हजाराें स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्राें में बच्चाें को भोजन परोसा जा रहा है। लेकिन स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्राें में बच्चे जिस भोजन को ग्रहण कर रहे हैं उसकी शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है। मंडी जिले में करीब पांच हजार स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें 1729 प्राइमरी स्कूल, 709 मिडिल स्कूल और 3004 आंगनबाड़ी केंद्रों में हर रोज बच्चों को भोजन परोसा जाता है। स्वास्थ्य विभाग के पास डेढ़ दर्जन स्कूलों के ही आवेदन अभी तक पहुंच पाए हैं। लाइसेंस बनाने को चार फरवरी की डैडलाइन तय की है। इसके बाद लाइसेंस न बनवाने पर प्रतिदिन सौ रुपये की पेनल्टी लगेगी। लाइसेंस न होने पर पांच लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है।
जल्द लाइसेंस बनवाए सरकार
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के तहत स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के भी लाइसेंस बनाना जरूरी हैं। चार फरवरी लाइसेंस बनाने की अंतिम तारीख है। जल्द लाइसेंस नहीं बनाए तो तय समय अवधि के बाद नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
लीलाधर ठाकुर फूड इंस्पेक्टर।
