
मंडी। मिनी पंजाब के नाम से मशहूर बल्ह घाटी के किसानों की लंबे समय से चली आ रही समस्या का जल्द हल होगा। सुकेती खड्ड के तेज बहाव और सिल्ट से होने वाली समस्या से किसानों को निजात मिलेगी। सुकेती खड्ड के तटीयकरण की कवायद तेज हो गई है। स्वां नदी की तर्ज पर सुकेती खड्ड के तटीयकरण का मॉडल तैयार करने को एकमात्र रिसर्च सेंटर पुणे सेंटर वाटर पावर रिसर्च सेंटर में अध्ययन के लिए भेज दिया है। करीब दो-तीन माह में मॉडल तैयार होने के आसार हैं। आईपीएच विभाग उपमंडल बग्गी के एसडीओ ने इसकी पुष्टि की है।
पुणे सेंटर वाटर पावर रिसर्च सेंटर से गत रोज एक टीम ने योजना स्थल का निरीक्षण भी किया है। सुकेती खड्ड पर पुंघ से चक्कर तक तटीयकरण का कार्य होगा। इसके लिए विभाग ने टीम को योजना से जुड़ा जरूरत का सारा डाटा सौंपा है। विभाग ने सुकेती खड्ड पर 25 किमी तक चैनेलाईजेशन के लिए 339 करोड़ की अनुमानित लागत तय की है। चैनलाईजेशन से भूमि कटाव के साथ अवैध खनन सहित सिल्ट की समस्या का भी हल होगा। इसके अतिरिक्त विभाग की सुकेती खड्ड में मिलने वाले छोटे नालाें के लिए चैकडैम बनाने की भी योजना है। इससे बावड़ियों और अन्य पेयजलस्रोतों के रिचार्ज होने की उम्मीद है। आईपीएच उपमंडल बग्गी के एसडीओ आरसी ठाकुर ने कहा कि तटीयकरण को लेकर मॉडल पर कार्य चल रहा है। कार्य पूरा हो जाने के बाद विभाग प्रपोजल स्टेट लेवल टैक्नीकल कमेटी को भेजेगा।
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दायरा बढ़ाने पर जताया आभार
हिमाचल किसान यूनियन प्रदेशाध्यक्ष सुंका राम ठाकुर तथा महासचिव सीता राम वर्मा ने सुकेती खड्ड के चैनेलाईजेशन का दायरा तेईस किमी से पच्चीस किमी करने पर आभार जताया है। सीताराम वर्मा ने बताया कि बल्ह समेत नाचन क्षेत्र में सुकेती खड्ड से आसपास की कई बीघा जमीन का प्रतिवर्ष कटाव हो रहा है। बीएसएल परियोजना के सुंदरनगर जलाशय से हजारों क्यूविक सिल्ट बरसात में सुकेती खड्ड में बहाई जाती है। इससे किसानों के खेतों की उर्वरा शक्ति शिथिल हो गई है। यूनियन ने आबकारी एवं कराधान मंत्री का आभार जताया है।
