साहब! कुर्सी छोड़िए, निरीक्षण को निकलिए

चंबा। शिक्षा विभाग के अधिकारी अब दफ्तर में कुर्सी पर बैठकर ही ड्यूटी नहीं कर सकेंगे। विभाग के अधिकारियों को जगह-जगह स्कूलों में जाकर औचक निरीक्षण करना होगा। ऐसा न होने पर निदेशालय की ओर से संबंधित अधिकारियोें से जवाब-तलब किया जाएगा। अब साहब को कुर्सी छोड़कर स्कूलों के निरीक्षण पर निकलना अनिवार्य हो गया है।
निदेशालय ने प्रदेश भर के शिक्षा उपनिदेशकों को 16 स्कूलों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश जारी किए हैं। इन 16 स्कूलों का निरीक्षण एक माह के भीतर करना अनिवार्य होगा। हर माह 16 स्कूलों का निरीक्षण नहीं किया जाता है तो निदेशालय की ओर से कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है। निरीक्षण के इस टारगेट को शिक्षा उपनिदेशक, विभाग के डिप्टी डीईओ, ओएसडी और बीपीओ को संयुक्त रूप से पूरा कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि पहले शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूलों का उचित ढंग से निरीक्षण नहीं कर पाते थे। साल भर में 20 से 25 स्कूलों का निरीक्षण कर अपना काम निपटा लेते थे। इससे दूरदराज के क्षेत्रों के स्कूलों की स्थिति के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं होती थी। जिला चंबा के भरमौर, तीसा, सलूणी में कई ऐसे स्कूल है जहां पर शिक्षा उपनिदेशक सहित अन्य अधिकारी साल भर में मात्र एक दो बार ही एक दो स्कूलों का निरीक्षण करते थे।
इनसेट
पांगी में 15 साल से नहीं पहुंचे अधिकारी
चंबा। जनजातीय क्षेत्र पांगी की बात करें तो उच्च शिक्षा विभाग क ा कोई भी अधिकारी पिछले 15 साल से वहां नहीं पहुंच पाया है। यही हाल प्रारंभिक व मिडल स्कूलों का है, लेकिन अब निदेशालय के निर्देशानुसार स्कूलों के निरीक्षण का टारगेट मिलने के चलते इसमें सुधार हो सकता है। उम्मीद है दुर्गम क्षेत्रों में अधिकारी शिक्षा का हाल जानने पहुंचेंगे। ऐसे में विभागीय अधिकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति से रू-ब-रू हो सकेंगे।
कोट
अधिकारी संयुक्त रूप से पूरा करेंगे टारगेट
प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक सुरेंद्र सिंह पठानिया ने बताया कि हर माह 16 स्कूलों का निरीक्षण करने के निदेशालय से निर्देश मिले हैं। उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से टारगेट को पूरा करेंगे।

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