
रुद्रप्रयाग। बीआरओ के अधीन सड़कों को छीनने के मामले में प्रदेश सरकार के रोल बैक करने से जनपदवासी खुश हैं। विपक्षी दल भाजपा सहित अन्य लोगों ने इसे जनता की जीत बताया है।
बता दें कि बीआरओ पर सुस्ती का आरोप लगाते हुए प्रदेश सरकार उत्तराखंड में बीआरओ की अधीन सड़कों को छीनकर लोनिवि को देने की योजना बना रही थी। इस बाबत केंद्र सरकार से भी वार्ता की गई थी। लेकिन शुरू से सरकार के इस निर्णय का लोग विरोध करते आ रहे थे। ‘अमर उजाला’ की ओर से लोनिवि की सड़कों की खस्ताहाल और संसाधनों पर रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी। सोमवार को केदारघाटी के लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य सचिव से इस मुद्दे पर मिला था, जिसमें मुख्य सचिव ने जानकारी दी कि बीआरओ की सड़कें यथावत रहेंगी।
पूर्व विधायक केदारनाथ क्षेत्र आशा नौटियाल ने बताया कि लोनिवि केे पास बीआरओ की तुलना में संसाधन नहीं है। बीआरओ केंद्र सरकार के अधीन एजेंसी हैं, जिसके पास बजट की ज्यादा दिक्कत भी नहीं होती। इसके बावजूद यात्रा और सीमांत मार्ग को लोनिवि को सौंपने की कोशिश अव्यवहारिक था।
केदारघाटी पुनर्वास एवं संघर्ष समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय का कहना है कि जनता का संघर्ष रंग लाया। वह इस मसले पर राज्यपाल से लेकर तमाम अधिकारियों से मिले। तब सरकार को पीछे हटना पड़ा। भाजपा जिलाध्यक्ष विजय कप्रवाण ने बताया कि पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी के प्रयासों से सरकार को पीछे हटना पड़ा।
