
चंबा। जिला चंबा भारी बर्फबारी व बारिश के कारण शीत लहर की चपेट में आ गया है। जिले के सभी उपमंडलों में एक साथ हिमपात दर्ज किया गया है। करीब दो दशकों बाद चंबा शहर में क्रिसमस से पूर्व बर्फबारी दर्ज की गई है। इसके अलावा कई दशकों बाद जिले में दिसंबर माह की पहली ही बारिश के साथ हिमपात दर्ज किया गया। शनिवार को अचानक मौसम के करवट बदलने के साथ ही जिला घने बादलों से ढक गया था। दिन भर बादल छाए रहने के कारण एकदम तापमान गिर गया और शाम सात बजे के करीब बारिश शुरू होने के साथ ही बर्फबारी का सिलसिला भी शुरू हो गया। इसके चलते जहां डलहौजी, खज्जियार, जोत, भरमौर, होली, पांगी, तीसा व सलूणी क्षेत्रों में भारी हिमपात हुआ, वहीं चंबा शहर भी रातोंरात बर्फ की सफेद चादर में छिप गया। सुबह उठते ही चंबावासियों ने दो दशकों बाद क्रिसमस से पूर्व हुई बर्फबारी का आनंद लिया। उधर, जिले के विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में छह इंच से लेकर 36 इंच तक बर्फ दर्ज की गई है। वहीं ऊपरी पहाड़ियों में इससे भी कहीं अधिक हिमपात होने का अनुमान है। बर्फ गिरने के साथ ही जिलावासियों की दिक्कतें भी बढ़ गई हैं। कई इलाके यातायात, बिजली, पानी और चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं से कट गए हैं। लोगों को ठंड में घरों में ही दुबक कर ठिठुरने को मजबूर होना पड़ा है। इसके अलावा बाहर से आने वाले फल, सब्जियों, दूध, ब्रेड व अन्य जरूरी सामान के वाहन भी नहीं पहुंच पाए। इससे भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उधर, हिमपात के कारण जिले के प्रमुख मार्गों सहित कई लिंक मार्ग बंद रहे। हालांकि चंबा-पठानकोट मार्ग सुबह बर्फ के कारण थोड़ी देर ही बंद रहा। इसके बाद इस पर यातायात बहाल कर दिया गया। वहीं तीसा, भरमौर, जोत, साहो, जुम्हार सहित अधिकतर मार्ग बंद रहे। सलूणी मार्ग पर भी दिन भर बसें नहीं चल पाईं। सिर्फ एक निजी बस के चालक-परिचालक ने हिम्मत दिखाते हुए सवारियों को चंबा पहुंचाया। उपायुक्त संदीप कदम ने बताया कि बर्फबारी के कारण किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे कुछ मार्ग बंद हुए हैं, इन्हें बहाल करने की कोशिश जारी है।
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16 साल बाद व्हाइट क्रिसमस देखेगा चंबा
पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष पीसी ओबराय ने बताया कि लगभग 16 साल पहले क्रिसमस पर हिमपात हुआ था। उन्होंने कहा कि पहले क्रिसमस से एक दिन या दो दिन पहले बर्फ बारी होती थी, लेकिन पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ होने के कारण कई सालों से जनवरी माह से पहले बर्फबारी नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि दो दशक पहले अक्तूबर व नवंबर माह में भी बर्फ गिरती थी।
