
चोटियों की चांदी को देखने के लिए पर्यटकों ने क्षेत्र का रुख कर लिया है। बर्फ से लकदक पहाड़ियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
पढ़ें, उत्तराखंड में पलायन को बढ़ावा दे रहा ‘यूपी’
ऊंची पहाड़ियों पर एक से डेढ़ फीट तक बर्फ पड़ी है और इसका सिलसिला जारी है। पछवादून में भी तापमान गिरने से ठंड बढ़ गई है।
पढ़ें,दिल्ली फतह के बाद पहाड़ पर चढ़ेंगे केजरीवाल
शनिवार रात को मौसम ने करवट ली और ऊंची पहाड़ियों पर हिमपात होने लगा। जनजातीय क्षेत्र की ऊंची पहाड़ियों मुंडाली, खड़ंबा, देववन, देवती, बुधेर, मोल्टा, चाईशील, खादरा, बोगीधार आदि ने बर्फ की चादर ओढ़ ली है।
नागथात में बर्फ की फुहारें पड़ीं। समीप की पहाड़ियां बैराटखाई, चुरानी, झुलका डांडा, गढ़ बैराट का टिबा, सिंगौरकांडी में बर्फबारी हुई।
तलहटी में भी हुआ हिमपात
ऊंची पहाड़ियों के साथ ही तलहटी में बसे गांवों में भी हिमपात हुआ है। लोग घरों में कैद हो गए हैं।
भरम खत के ठारठा, कांडोई, भरम, कुनवा, पिंगुवा, गोरछा, बेगी, बागनी, बुल्हाड़, डीडा, नोहरा, कावा, उटेड़ा, सिलगांव खत के डांगुठा, पटियूड़, भुनाड़, ऐठाड़, भटाड़, भूट, फनार, ओभराशेर, बगूर, लोकाड़, डिनराड़, देवघार खत के पटाला, शाशगीर, डेरसा, प्यूनल, चोरीलानी समेत कुल 30 से अधिक गांवों में बर्फबारी से जन जनजीवन ठप हो गया है।
हिमपात से पांच सड़कें बंद
हिमपात से लोनिवि चरकाता अंतर्गत दो मुख्य और तीन संपर्क मार्ग बंद हो गए। लोखंडी-चकराता, त्यूनी-कथियान, लोखंडी-पिपरा संपर्क मार्ग बंद होने से करीब 30 गांवों की आवाजाही ठप है।
पढ़ें, हरीश रावत को नहीं पसंद हैं ये तीन
चकराता-मसूरी और त्यूनी-चकराता मोटर मार्ग भी बर्फबारी के कारण कई जगह बंद हो गया है। बर्फबारी से कई वाहन रास्ते में फंसे हैं। लोगों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए मीलों पैदल चलना पड़ रहा है।
बागवानों के चेहरे खिले
ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से बागवानों के चेहरे खिल गए हैं। बर्फबारी से ज्यादा लाभ सेब को होगा। शीतोष्ण फल जैसे नाशपाती, आड़ू, खुमानी, पूलम, अखरोट, बादाम को भी लाभ पहुंचेगा।
तापमान गिरने और बर्फबारी से मार्च और अप्रैल तक नमी संरक्षित रह सकेगी। इससे फ्लोरिंग और फ्रूटिंग अच्छी होगी।
पढ़ें, सौतेले बाप ने पार की क्रूरता की सारी हदें
कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के प्रभारी वैज्ञानिक डा. एसएस सिंह का कहना है कि बारिश से पर्वतीय क्षेत्रों में गेहूं के उत्पादन में इजाफा होगा। गेहूं की फसल को बारिश की सख्त जरूरत थी। फसलों की जलवायु डिमांड पूरी होगी। आम और लीची को भी लाभ मिलेगा।
