काम मिले तो ठग बहादुर, पैसा मिले तो फुर्र बहादुर

शिमला। ‘काम मिले तो नाम मेरा ठग बहादुर और पैसा मिले तो नाम मेरा फुर्र बहादुर’ स्वांग के साथ गेयटी थियेटर में विजेश्वर कला मंच ने वीरवार को करयाला की शुरुआत की। इसमें काम मांगने के नाम पर ठगी, चोरी करने वालों पर व्यंग्य कसे गए। इस स्वांग पर दर्शकों ने पेट पकड़-पकड़कर ठहाके लगाए। पंजाब नेशनल बैंक के मंडल प्रमुख वीके सूद ने इसमें बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम में मंच के अनिल कुमार ने ‘मोती वे मेरा खोया’ गीत पर चंद्रावली नृत्य किया गया।
इस दौरान साधु के स्वांग पर भी दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं। इस स्वांग में साधुओं को अखाड़ों के साथ मंच पर प्रवेश करते दिखाया गया। यहां सूत्रधार ने साधु से पूछा – कहां से तुम जोगी आए, कहां तुम्हारा गांव, कौन तुम्हारी बहन-भांजी, कहां धरोगे पांव।’ जवाब में साधु कहता है – पूर्व देश से आए हम, पश्चिम हमारा गांव, धरती हमारी बहन-भांजी, स्वामी की छाती पर धरेंगे पांव।’ करयाला में स्थानीय सोहन पार्टी ने बांग्ला स्वांग पर प्रस्तुति देकर दर्शकों को गुदगुदाया। इस स्वांग में हाथ में डंडा पकडे़ अपनी भाभी को छेड़ते हुए ‘लंगड़ा मैं तेरो देवर भाभिये’ गीत पर स्वांग रचाया गया। इस दौरान लोक गायिका बसंती देवी और सुनीता रघुवंशी ने भी लोकगीत की प्रस्तुतियों से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। सोहन पार्टी की ओर से भरत राम, चेत राम, हीरा लाल, देवी राम, दिलीप सिंह, मोहनलाल, सूरज प्रकाश और रामू ने अभिनय किया।
कार्यक्रम के संयोजक दीप राम शर्मा ने बताया कि करयाला प्राचीन विधा है आधुनिकता के कारण लोक नाट्य का अस्तित्व खो रहा है। 80 वर्षीय कलाकार लच्छी राम ने बताया कि युवाओं को संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए।

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