आरक्षण पर सदन में टकराव

धर्मशाला। तपोवन स्थित विधानसभा भवन में सदन की कार्यवाही के चौथे दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष में आरक्षण को लेकर खूब हो हल्ला हुआ। आरक्षण के आधार और ओबीसी आरक्षण को लेकर धूमल और कौल सिंह में गहमागहमी हो गई। आशा कुमारी की ओर से सदन में पेश किए गए आरक्षण के संकल्प प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान माहौल तनावपूर्ण बना रहा। आशा कुमारी और रिखी राम से शुरू हुई गहमागहमी धूमल और कौल सिंह तक पहुंच गई। आर्थिक आधार पर आरक्षण के प्रस्ताव पर जवाब देते हुए कौल सिंह ने कहा कि इस पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। कौल ने जैसे ही कहा कि पंचायत स्तर पर ओबीसी को 15 से 18 प्रतिशत तक आरक्षण कांग्रेस की ही देन है। जिस पर धूमल ने कहा कि आम आबादी के आधार पर आरक्षण देते हो या राजनीति आधार पर। इतने में दोनों पक्षों के बीच माहौल गरमा गया। कांग्रेस विधायकों ने विपक्ष पर तीर छोड़ते हुए कहा कि हमने एससी के प्रेजिडेंट बनाए, लोस स्पीकर बनाए, आपने क्या किया। वहीं प्रदेश में ओबीसी को दिए गए आरक्षण को लेकर भी दोनों पक्षों में गहमागहमी हुई। दोनों पक्ष ओबीसी आरक्षण का क्रेडिट लेने के लिए बहस करते रहे।

कुछ नासमझ हैं!
आर्थिक आरक्षण के संकल्प प्रस्ताव के दौरान ही आशा कुमारी और रिखी राम कौंडल में गहमागहमी हो गई। कौंडल ने इस प्रस्ताव को राजनीति पर आधारित बताते हुए कहा कि चार राज्यों में हार के बाद यह नया पैंतरा है। जिस पर आशा कुमारी ने कहा कि यह प्रस्ताव दो दिसंबर को दिया गया है, जबकि चुनाव के परिणाम आठ दिसंबर को घोषित हुए। आशा कुमारी ने यहां तक कह दिया कि सदन में कुछ इतने नासमझ भी बैठे हैं, इसीलिए उन्होंने यह जानकारी भी दे दी। जिस पर विपक्ष नेता प्रेम कुमार धूमल ने कुर्सी छोड़ आशा के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मैडम जो सदन में चुनकर आए हैं, वे सभी समझदार ही हैं। जिस पर सदन का माहौल गरमा गया। हालांकि, आशा कुमारी ने अपने शब्द वापस ले लिए और माहौल शांतिपूर्वक हो गया।

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