
गोपेश्वर/जोशीमठ। सरकार के संविदा कर्मियों को नियमित नियुक्ति देने के फैसले के बाद जनपद के जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान और सगंध पौध केंद्र में तैनात संविदा कर्मचारियों में संशय की स्थिति बनी हुई है। दरअसल, संस्थान में पिछले पंद्रह वर्षों से माली, मास्टर ट्रेनर, तकनीकी सलाहकार पदों पर 48 फील्ड कर्मचारी सेवा दे रहे हैं, लेकिन अभी तक संस्थान में ये पद स्वीकृत नहीं हैं। इससे संविदा कर्मचारियों में मायूसी है। वर्ष 1992 में हिमालयी जड़ी-बूटियों के कृषिकरण और शोध की मंशा से मंडल में जड़ी-बूटी शोध संस्थान की स्थापना की गई। स्थापना के 21 वर्षों के बाद भी संस्थान संविदा कर्मचारियों और वैज्ञानिकों के भरोसे चल रहा है। संस्थान में स्वीकृत 23 पदों के सापेक्ष सिर्फ 4 पदों पर ही नियमित कर्मचारियों की तैनाती है। संस्थान में फील्ड कर्मचारियों के पद स्वीकृत हैं ही नहीं जबकि वर्तमान में यहां 48 फील्ड कर्मचारी संविदा पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारी विजय प्रसाद, महेंद्र सिंह चौहान, राजेंद्र सिंह और दीपक का कहना है कि सरकार संस्थान और सगंध पौध केंद्र के संविदा कर्मचारियों की अनदेखी कर रही है।
