
बैजनाथ (कांगड़ा)। प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायतों में शुमार बैजनाथ और पपरोला को नगर परिषद का दर्जा देने का मुद्दा शीतकालीन विधानसभा सत्र में उठ सकता है। राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनावी मुद्दा रहे इस मामले को फिर से हवा मिलने की उम्मीद है। बैजनाथ पंचायत के 11 वार्डों में 6 हजार के करीब और पपरोला के 13 वार्डों में 7 हजार मतदाता हैं। ऐसा नहीं है कि यह मुद्दा पहली मर्तबा उठेगा। इससे पूर्व भी 1978 और 2001 में दोनों पंचायतों को नगर पंचायतों का दर्जा नसीब हो चुका है, लेकिन नगर पंचायतों के तौर पर चुनावी प्रक्रिया पूरा न होने के कारण इसे भंग कर दिया गया था। वर्तमान हालातों को देखते हुए दोनाें कस्बों के लोग इसे नगर परिषद का दर्जा देने के हक में हैं और कांग्रेस सरकार इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करके आगामी लोकसभा चुनाव में इसका लाभ ले सकती है। गत विधानसभा चुनावों से पूर्व भाजपा सरकार के नुमाइंदों ने नगर परिषद बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी और बैजनाथ, पपरोला, खडानाल, पपरोला खास, उस्तेहड और घिरथोली पंचायतों के प्रधानाें के साथ बैठक कर आपत्तियों पर विचार-विमर्श किया था । मगर चुनावी समय में किसी प्रकार का जोखिम न उठाने के चलते मुद्दा ठंडे बस्ते में चला गया था। कांग्रेस के विधायक किशोरी लाल का कहना है कि मुद्दे को सत्र में रखे जाने की संभावना है और आम राय से दोनाें पंचायतों के विकास के लिए नगर परिषद का दर्जा मिल सकता है। भाजपा के प्रत्याशी रहे मुलख राज प्रेमी का कहना है कि भाजपा के कार्यकाल में ही इसकी शुरुआत हुई थी और यह दोनों कस्बों के विकास के लिए अहम है।
