सीयू के मुद्दे पर पक्ष-विपक्ष की चुप्पी

धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के ज्वलंत मुद्दे से प्रदेश के दोनों प्रमुख दल बचते दिख रहे हैं। तपोवन विस भवन में 16 दिसंबर से शुरू होने वाले शीतकालीन सत्र से सेंट्रल यूनिवर्सिटी का मुद्दा गायब है। दरअसल किसी भी विधायक ने इस प्रश्न को सदन में चर्चा के लिए नहीं डाला है। उल्लेखनीय है कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी को लेकर प्रदेश की राजनीति में काफी भूचाल रहा है। खासतौर पर विधानसभा चुनाव में भी यह मुद्दा खूब गरमाया था। दोनों दलों ने सीयू के नाम पर जनता से वोट ऐंठने में कोई कमी नहीं छोड़ी, लेकिन चुनाव के बाद दोनों दल इस मुद्दे पर चर्चा से बचते दिख रहे हैं। यही कारण है कि शीतकालीन सत्र से सेंट्रल यूनिवर्सिटी का मुद्दा ही गायब दिख रहा है, लेकिन प्रदेश की जनता जल्द से जल्द इस मुद्दे का हल चाहती है। पांच साल बीत जाने के बाद भी सीयू का शिलान्यास नहीं हो पाया है। जिसका कारण क्षेत्रीय राजनीति मानी जाती रही है। देहरा और धर्मशाला में केंद्रीय विश्वविद्यालय को स्थापित करने को लेकर अटकलें रही हैं।

सुविधा के बावजूद लाभ नहीं
हिमाचल प्रदेश को 2009 में केंद्रीय विश्वविद्यालय मंजूर होने पर यहां के युवाओं को आस थी कि उनके दिन फिरेंगे, लेकिन करीब पांच साल बीतने के बाद भी सीयू को अपना भवन नसीब नहीं हो पाया है। सीयू में नाममात्र विभाग ही चल रहे हैं। सीयू में हजारों की सुविधा होने के बावजूद सैकड़ों छात्र ही शिक्षा पा रहे हैं। एक हजार करोड़ रुपये का बजट होने के बावजूद प्रदेश का युवा वर्ग उच्च शिक्षा के लिए बाहरी राज्यों और निजी संस्थानों का रुख करने को मजबूर है।

नहीं है प्रश्नों में शामिल : सुधीर
धर्मशाला के विधायक व शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा का कहना है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय का मुद्दा केंद्र का है तथा इसे सदन में उठने वाले प्रश्नों में शामिल नहीं किया गया है।

समय मिला तो उठाएंगे मुद्दा : रवि
देहरा हलके के विधायक रविंद्र सिंह रवि का कहना है कि सीयू का प्रश्न चर्चा के लिए नहीं डाला गया है, लेकिन सदन में समय मिलने पर इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की जाएगी।

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