SSP दून हुए ‘बेघर’, 31 तक खाली होगा बंगला

राजधानी देहरादून में 63 साल से जिस कोठी में शहर पुलिस कप्तान रहते चले आ रहे हैं, उसे इसी 31 तारीख को सरकार खाली करने जा रही है। इसे खरीदने की प्रक्रिया को अचानक रोककर यह फैसला कइयों को हजम नहीं हो रहा है।

राजपुर रोड स्थित करीब 10 हजार वर्ग मीटर में फैले इस क्षेत्र में वर्ष 1950 से ही एसएसपी का निवास व शिविर कार्यालय चलता आ रहा है। खुले बाजार में इस भूमि की कीमत तीन सौ से चार सौ करोड़ के बीच बताई जा रही है।


बंगले का इतिहास

आइए अब इसके इतिहास में चलें। इस बंगले की मालकिन शांति देवी ने 90 के दशक में हाईकोर्ट में बंगला खाली करने का केस दायर किया था।

तब कोर्ट ने 86 हजार रुपये प्रति माह शांति देवी को किराया देने की व्यवस्था की। कोर्ट ने सरकार को बंगला और जमीन खाली करने या खरीदने करने का विकल्प भी दिया था।

लगभग तीन महीने पहले मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में पहले समूचे क्षेत्र को खरीदने का फैसला हुआ, फिर कोर्ट की मंशा के मुताबिक कोठी की करीब डेढ़ हजार वर्ग मीटर भूमि खरीदने की बात हुई। इसकी कीमत करीब 50 करोड़ बैठती।

सौदे में मोटी कीमत के मद्देनजर बाद में बंगला खाली करना ही मुनासिब समझा गया। शुक्रवार को जारी आदेश के मुताबिक कप्तान के रहने की व्यवस्था पुलिस कालोनी में की गई है।

ताज्जुब की बात है कि कई साल पहले इस जमीन के अधिग्रहण के लिए सरकार की ओर से 60 लाख रुपये जमा भी कराए जा चुके हैं। पिछले 18 साल से चल रहे इस मुकदमे से सरकार ने अचानक हाथ खींचकर कई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

पुत्र रंजीत ने कानूनी लड़ाई लड़ी
दो साल पहले दिसंबर 2011 में जमीन की मालकिन शांति देवी की मृत्यु के बाद उनके पुत्र रंजीत ने कानूनी लड़ाई लड़ी। रंजीत ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की हुई है और छह जनवरी तक सरकार को प्रति शपथपत्र पेश करना है।

अफसरों का दबाव
जानकारों का कहना है कि सरकार को शपथपत्र दाखिल करने के लिए और समय भी मिल सकता था। जमीन पर मालिकाना हक जताते हुए डीएवी ट्रस्ट ने भी हाईकोर्ट में याचिका लगाई है।

मालिकाना हक तय हुए बगैर ही सरकार के पैर पीछे खींचने के पीछे अफसरों के एक गुट का दबाव बताया जा रहा है। एक अफसर के मुताबिक, इस फैसले के बाद शहर के प्राइम लोकेशन में स्थित अन्य सरकारी प्रतिष्ठान व आवास को खाली कराने का रास्ता साफ हो सकता है।

इस जमीन को खरीदने के लिए मोटी रकम चाहिए थी। बाद में यही तय हुआ कि नई जगह एसएसपी का बंगला बना दिया जाए।

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