कांग्रेस भवन के बिजली-पानी पर बवाल

शिमला। कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन के निर्माण के बाद अब यहां बिजली और पानी कनेक्शन को लेकर बवाल मच गया है। बिजली के अस्थायी कनेक्शन को लेकर नगर निगम और बिजली बोर्ड आमने-सामने आ गए हैं। बिजली बोर्ड का दावा है कि नगर निगम की मंजूरी के बाद भवन निर्माण के दौरान सालों पहले कंस्ट्रक्शन वर्क के लिए छह महीने का अस्थायी कनेक्शन दिया था। भवन बनकर तैयार भी हो गया है बावजूद इसके अभी भी अस्थायी कनेक्शन है। बिजली बोर्ड ने सारा दोष नगर निगम के सिर मढ़ते हुए कहा कि अगर नगर निगम उन्हें लिखित में दे तो बिजली काट देंगे। वहीं, नगर निगम का कहना है कि यह बिजली बोर्ड को देखना है क्योंकि कनेक्शन उन्होंने दिया है। बोर्ड के कर्मचारी ही मौके पर जाते हैं। इतने साल अंजान क्यों बने रहे, जब नगर निगम से जारी हुई तय सीमा समाप्त हो गई तो बिजली बोर्ड कार्रवाई करता। उधर, कांग्रेस भवन में बिजली के साथ पानी भी जुगाड़ तंत्र से चल रहा है। प्राकृतिक स्रोत से पानी को लिफ्ट किया गया है। हालांकि कांग्रेस नेता का दावा है कि वह पानी का टैंकर मंगवाते हैं।

कांग्रेस भवन पर भी उठे हैं सवाल
कांग्रेस भवन का नक्शा तीन मंजिल प्लस ओपन पार्किंग स्वीकृत है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर भवन का निर्माण किया गया है। इस भवन में नीचे की तीन मंजिलों (बेसमेंट) को बंद रखा है। इन्हें खोलने के लिए स्वीकृति मांगी गई। नगर निगम ने साफ किया है कि वह केवल दस फीसदी डेविएशन तक अधिकृत है। इसमें करीब डेढ़ करोड़ की पेनल्टी लग सकती है। लेकिन भवन निर्माण में दस फीसदी से कहीं अधिक डेविएशन है। लिहाजा, इस भवन को नियमित करना नगर निगम के क्षेत्राधिकार से बाहर है। कांग्रेस भवन के पास कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी नहीं है। इसी वजह से कांग्रेस भवन को बिजली और पानी का स्थायी कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है।
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भाजपा सरकार ने बैठाई थी जांच
भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद कांग्रेस भवन मामले में नगर निगम को जांच के आदेश दिए थे। तत्कालीन नगर निगम आयुक्त से कहा गया था कि उन सभी निगम के अफसरों को चार्जशीट कर दिया जाए जिनके कार्यकाल के दौरान कांग्रेस भवन की अवैध मंजिलों का निर्माण हुआ। जांच कमेटी बनाई गई, लेकिन परिणाम ढाक के तीन पात रहा।

एमसी लिखित दे, बिजली काट देंगे
अधिशासी अभियंता शिमला (सिटी डिविजन) विशेश्वर शर्मा ने कहा कि कंस्ट्रक्शन वर्क के लिए बिजली का अस्थायी कनेक्शन नगर निगम के एनओसी के बाद छह माह के लिए दिया जाता है। उसके बाद भी अगर कनेक्शन लगा रहे तो उसे हटाने के लिए नगर निगम उन्हें लिखित में दे, वह बिजली काट देंगे।

जिम्मेदारी बिजली बोर्ड की
नगर निगम आयुक्त अमरजीत सिंह ने कहा कि बिजली के अस्थायी कनेक्शन में कोई समय सीमा निर्धारित नहीं होती। इस मामले में नगर निगम नहीं बल्कि बिजली बोर्ड अपने स्तर पर ही कार्रवाई कर सकता है। अगर नगर निगम ने अस्थायी कनेक्शन को लेकर छह माह की स्वीकृति दी है तो समयावधि पूरी होने के बाद कार्रवाई करने की जिम्मेदारी बिजली बोर्ड की ही रहेगी।

अस्थायी नहीं बल्कि कार्मिशयल कनेक्शन
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नरेश चौहान ने कहा कि कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में बिजली का अस्थायी नहीं बल्कि कार्मिशयल कनेक्शन लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि बाकायदा बिजली बिल भी जमा करवाया जाता है। हालांकि इन्होंने माना कि पानी का कनेक्शन नहीं है। लिहाजा, पानी टैंकर से मंगवाया जाता है।

दोहरे नियम न अपनाएं
भाजपा प्रवक्ता गणेश दत्त ने कहा कि कांग्रेस भवन की करीब ढाई मंजिलें अवैध हैं। नगर निगम क्यों कांग्रेस कार्यालय को नोटिस नहीं भेजता? नगर निगम के आम लोगों के लिए अलग कानून हैं और कांग्रेस के लिए अलग। नगर निगम और बिजली बोर्ड को चाहिए कि नियमों के मुताबिक कार्रवाई करें। जैसे आम लोगों पर नियम तोड़ने के बाद कार्रवाई होती है। कांग्रेस के लिए दोहरे नियम न अपनाएं।

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