
शिमला। ‘न टिकट मिलेगा न बकाया, जो मर्जी कर लो’। शहर की एक प्राइवेट बस में सफर कर रहे यात्री को उस समय यह जवाब मिला, जब उसने कंडक्टर से बकाया वापस मांगा। संजौली से वाया छोटा शिमला ओल्ड बस स्टैंड की ओर आ रही प्राइवेट बस एचपी-64-2673 में यह वाक्या पेश आया। संजौली से बस में सवार यात्री ने कंडक्टर को 10 रुपये देते हुए टॉलैंड का टिकट मांगा। कंडक्टर ने न तो बकाया लौटाया न ही टिकट दिया। टॉलैंड में बस से उतरते हुए यात्री ने जब कंडक्टर से बकाया और टिकट मांगा तो कंडक्टर ने हाथ हिलाते हुए यात्री को बस से उतरने का इशारा करते हुए साफ कह दिया, ‘न टिकट मिलेगा न बकाया, जो मर्जी कर लो।’ यह सिर्फ एक दिन की ही बात नहीं है। शहर में दौड़ रही निजी बसों में यात्रियों के साथ रोजाना इसी तरह का व्यवहार हो रहा है। कंडक्टर यात्रियों से किराये के नाम पर मनमानी वसूली करते हैं। कोई विरोध करे तो उसे भरी बस में बेइज्जत कर दिया जाता है। संजौली से टॉलैंड का किराया आठ रुपये है जबकि कुछ निजी बसों में यात्रियों से 10 रुपये वसूली की जा रही है।
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी कैप्टन रमन शर्मा ने कहा कि मनमानी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उधर, प्राइवेट बस ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष कमल ठाकुर ने कहा कि टिकट देना अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी और यात्रियों से बदसलूकी करने वालों के खिलाफ यूनियन कार्रवाई करेगी।
