वार्ता का चल रहा दौर, कब मिलेगा स्मार्ट कार्ड

हल्द्वानी। परिवहन विभाग की स्मार्ट कार्ड योजना के जल्द लागू होने के आसार नहीं है। कर्मियों के विरोध को देखते हुए मुख्यालय योजना को लागू करने में हिचक रहा है। अब इस संबंध में जल्द ही अफसर और कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों से दूसरे चरण की वार्ता होनी है, इसके बाद ही योजना कब लागू होगी, कार्ड निजी क्षेत्र बनेगा या फिर कर्मचारी बनाएंगे स्थिति साफ होगी।
वर्तमान में परिवहन कर्मी लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन बनाते हैं। अभी यह लेमिनेशन वाले कार्ड और कागजों पर मिलता है। विभाग की पंजाब, चंडीगढ़ आदि राज्यों की तर्ज पर स्मार्ट कार्ड देने की योजना है, पर यह काम इन राज्यों में निजी क्षेत्र के सहयोग से होता है। इन कामों में परिवहन कर्मियों की भूमिका नहीं होती है। इसी को लेकर परिवहन कर्मियों ने मोर्चा खुला हुआ है। परिवहन मिनिस्ट्रीरयल कर्मचारी संघ का कहना है कि निजी क्षेत्र को पूरा काम देने की जगह संसाधन लेकर खुद कर्मचारियों से काम कराना चाहिए।
वहीं, मुख्यालय की मंशा इस काम को निजी क्षेत्र में देेने की लग रही है। इसे लेकर दोनों पक्षों में खींचतान है। कई बार बातचीत हो चुकी है, पर हल नहीं निकला। अब मामले के लिए मुख्यालय ने अफसरों का एक टीम बनाई है, जिसे कर्मचारियों से वार्ता का जिम्मा सौंपा गया है। इसमें उप परिवहन आयुक्त, आरटीओ देहरादून, पौड़ी और हल्द्वानी को शामिल किया गया है। आरटीओ एसके सिंह कहते हैं कि जल्द ही वार्ता कर मामला सुलझा लिया जाएगा। कर्मचारी संघ की प्रांतीय अध्यक्षा सुषमा चौधरी का कहना है कि नई योजना शुरू करना अच्छी बात है, इसके लिए कर्मचारियों का काम निजी क्षेत्र को देने की जगह महकमे के कर्मचारियों को दक्ष करना चाहिए। आखिरकार वाहन, सारथी जैसी योजनाओं को कुशलतापूर्वक लागू किया जा सकता है, तो यह काम कर्मचारी क्यों नहीं कर सकते हैं।

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