
करसोग (मंडी)। क्षेत्र के ऐतिहासिक ममलेश्वर महादेव मंदिर ममेल में बूढ़ी दिवाली पर्व का आयोजन धूमधाम से किया गया। उत्सव में दर्जनों देवी-देवताओं ने शिरकत की। दिवाली के ठीक एक माह बाद मनाए जाने वाला बूढ़ी दिवाली पर्व पूरे उपमंडल में मनाया जाता है। करसोग के ममलेश्वर महादेव मंदिर के अलावा थनाडी देव, देव दवाडी मंदिर दवाड, नाग तुंदली मंदिर, देव तेवनी चपासी, सोमेश्वर महादेव सोमा कोठी, देव छाउंटी, नाग चपलादू, महामाया मंदिर पांगणा, नाग धमूनी मंदिर डमेहल, नाग धमूली मंदिर कुन्हो, माहुंनाग, वेलु नाग, ककनो, खील शलोट, छांवटी देव मंदिर समेत अनेक मंदिर एवं देवठियों में सोमवार रात को बूढ़ी दिवाली पर्व का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर लोग अपने इष्ट देवता के मंदिरों में सामूहिक रूप से इकट्ठा हुए। कई मंदिरों में जगराते का आयोजन किया गया। कई देव मंदिरों में देवता के गूरों ने देव खेल के दौरान लोगों के प्रश्नों के जवाब दिए। मंगलवार को अनेक देवताओं के रथों सहित घास की रस्सी बनाकर एक-दूसरे गांव के लोगों के बीच रस्साकशी भी हुई। इसके बाद रस्सी के टुकड़े काटकर देवता के साथ आए सैकड़ों लोग इसे देवता का कवच मानकर अपने-अपने घरों की छतों पर पूरा साल रखने के लिए ले गए। इस अवसर पर अनेक मंदिरों में भंडारों का आयोजन भी किया गया। ममलेश्वर महादेव मंदिर करसोग में आयोजित भंडारे में सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान अपनी मन्नत पूरी होने पर लोग देवताओं को अपने घरों पर मेहमान के रूप में भी बुलाते हैं। अनेक देवता अपने रथों सहित ढोल नगाडे़, रणसिंगे, करनालों के साथ फेर पर निकलते हैं। मेहमाननवाजी का दौर कई दिनाे तक चलेगा।
