
जुखाला (बिलासपुर)। खड्ड में बोरियां और प्लास्टिक का कचरा। इर्दगिर्द सफाई का कोई ध्यान नहीं। पेयजल के मुख्य स्रोतों की दशा अधिकतर स्थानों पर ऐसी ही है। पानी सही तरीके से ट्रीट होकर लोगों तक नहीं पहुंचा तो आंत्रशोथ ही होगा? जबली, रघुनाथपुरा और मंडी माणवा में फैली महामारी भी इसी की वजह मानी जा रही है। जुखाला क्षेत्र को सप्लाई होने वाले पेयजल की स्थिति पर भी संतोष नहीं किया जा सकता।
पंजोग, वलेख, डिम्ब, ब्रह्मपुखर, घ्याणा, कोटला, निहारखन, बासला गांवों की लगभग दस हजार की आबादी इस पेयजल योजना का पानी प्रयोग कर रही है। पेयजल योजना में न तो फिल्टर की व्यवस्था है और न ही साफ-सफाई की। ग्रामीण कहते हैं कि यहां पेयजल टैंक में क्लोरीनेशन के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। मुख्य स्रोत पर गंदगी का साम्राज्य फैला हुआ है। ब्रह्मपुखर के गोपाल ठाकुर का कहना है कि इस पेयजल योजना में पानी की भी कमी रहती है। सप्ताह में एक-दो बार ही पानी की सप्लाई हो पाती है। पानी सीधा स्टोरेज टैंक में डाला गया है। ब्रह्मपुखर के कमलेश नड्डा का कहना है कि करीब तीस साल से विभाग लोगों को खड्ड का पानी सप्लाई कर रहा है। हैरत की बात है कि आजतक किसी भी अधिकारी ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया है। पंजोग के सुरेश कुमार का कहना है कि इस पेयजल योजना से जो पानी की सप्लाई की जाती है उसमें दवाई डालने के उचित इंतजाम नहीं है। धर्म पाल नड्डा का कहना है कि विभाग की तरफ से पानी की नियमित सप्लाई नहीं आ रही है। इस बारे शिकायत की जाए तो कहा जाता है कि विभाग के पास सामान उपलब्ध नहीं है।
विभाग के अधिशासी अभियंता पीसी ठाकुर ने संपर्क करने पर कहा कि उन्हें फिलहाल इसकी जानकारी नहीं है। यदि योजना में कोई खामी है तो उसे तुरंत दुरुस्त किया जाएगा।
