
बिलासपुर। क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में स्वास्थ्य विभाग की एक और लापरवाही सामने आई है। आंत्रशोथ से ग्रस्त एक बच्ची को सोमवार रात आईजीएमसी के लिए रैफर किया गया तो मरीज को एंबुलेंस तक मुहैया नहीं करवाई गई। यहां तक कि मरीज को लगे ऑक्सीजन सिलेंडर देने में भी आनाकानी की गई। मरीज के तीमारदार एवं वहां मौजूद अन्य लोगों के विरोध के बाद सिलेंडर तो दिया, लेकिन इसके लिए 1500 रुपये की सिक्योरिटी राशि चुकानी पड़ी। उधर, मंडी माणवा के लोगों के इन आरोपों को स्वास्थ्य विभाग से सिरे से खारिज कर दिया है।
बताया जा रहा है कि रात को मोना नामक बच्ची की तबीयत अचानक खराब हो गई। चिकित्सकों ने उसे आईजीएमसी के लिए रैफर किया। एंबुलेंस की व्यवस्था की जाने लगी तो पता चला कि उस दौरान वहां कोई एंबुलेंस नहीं थी। मरीज के लिए टैक्सी करनी पड़ी। मरीज को ऑक्सीजन लगी थी। आरोप है कि वहां तैनात कर्मचारी ने ऑक्सीजन मास्क निकाला। मरीज के तीमारदारों से सिलेंडर देने की बात कहीं तो बाहर से लेने के लिए कहा गया। वहां मौजूद लोग आग बबुला हुए तो अस्पताल प्रबंधन ने सिलेंडर दे दिया, लेकिन इसकी एवज में 1500 रुपये की सिक्योरिटी ले ली। उधर, लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री ने आंत्रशोथ पीड़ितों को तमाम दवाइयां मुफ्त देने का ऐलान किया है। आदर्श युवक मंडल प्रधान शुभम कुमार, उपप्रधान सलीम कुरैशी, एनएसयूआई के पूर्व अध्यक्ष अरुण मराठा, विशाल, सुशील, संजय चौहान ने मामले की जांच की मांग की है। उधर, अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. सतीश शर्मा ने कहा कि आरोप बेबुनियाद है। सिलेंडर लेकर जाने के बाद मरीज उसे वापस नहीं करते। इसी लिए यह सिक्योरिटी ली जाती है। सिलेंडर वापस मिलने पर राशि वापस की जाती है। उन लोगों ने स्वयं ही गाड़ी में मरीज ले जाने की बात कही थी।
