
धर्मशाला। पंचायतों में मनरेगा के तहत होने वाले विकास कार्यों का सारा ब्योरा रखने वाला एमआईएस सॉफ्टवेयर पंचायत प्रतिनिधियों के गले की फांस बना हुआ है। सॉफ्टवेयर में जहां सारी जानकारियां उपलब्ध करवाने का प्रावधान किया गया है, वहीं एक बड़ी खामी भी उभर कर सामने आई है। एमआईएस में मनरेगा के मजदूरों की आधी दिहाड़ी की हाजिरी लगाने का प्रावधान ही नहीं है। जिससे खासतौर पर पंचायत प्रधानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। काम के दौरान किसी मजदूर को जरूरी काम आ जाने पर वह चला जाता है तो उसकी दिहाड़ी को एमआईएस में दर्शाने का कोई विकल्प ही नहीं है। ऐसे में यदि प्रधान पूरी दिहाड़ी दर्शा देता है तो इंस्पेक्शन के दौरान उस पर गाज गिर सकती है। अब तक ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। इंस्पेक्शन के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों को इस तरह की परिस्थिति में कड़ी दिक्कत आ रही है, जिसकी कई पंचायत प्रधान शिकायत भी कर रहे हैं। प्रदेश में लगभग सभी पंचायतों में एमआईएस सॉफ्टवेयर कार्यरत है। जिससे प्रदेश भर की पंचायतों में यह समस्या बनी हुई है।
इनसेट
सुविधा न होने से दिक्कत
पंचायत प्रधान दाड़ी सविता कार्की, नेरटी की प्रधान राजेश्वरी देवी, सकोह के राजेंद्र कुमार का कहना है कि सॉफ्टवेयर में आधी दिहाड़ी दर्शाने की सुविधा न होने से दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। एमआईएस में ऐसा प्रावधान होना जरूरी है।
कोट्स
सॉफ्टवेयर में इस खामी के संदर्भ में उच्च अधिकारियों से बात की जाएगी तथा आवश्यक बदलाव किए जाने की कोशिश रहेगी।
..जिला कांगड़ा ग्रामीण विकास अभिकरण
परियोजना अधिकारी कुलवीर राणा।
