
फिल्म न्यूयार्क में जॉन अब्राहम का ‘मोबाइल बम’ देखा तो उत्तराखंड के अभिलाष के दिमाग में आइडिया कौंधा और कई महीनों की मेहनत के बाद उसने तैयार कर डाली ऐसी अनोखी डिवाइस जो कार बम का तोड़ है।
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आतंकियों ने किसी की कार चोरी कर बम लगाया तो यह डिवाइस तुरंत एसएमएस से बम और कार की लोकेशन मालिक के मोबाइल पर भेज देगी।
यूकॉस्ट को भेजी डिटेल्स
ग्राफिक एरा हिल विवि में बीटेक कंप्यूटर साइंस तृतीय वर्ष के छात्र और कर्णप्रयाग निवासी अभिलाष ने इसके पेटेंट के लिए यूकॉस्ट को डिटेल्स भेज दी हैं। अभिलाष ने पहले मोबाइल बम डिटेक्टर बनाया। इसके बाद शुरू हुई कार बम डिटेक्टर के लिए माथापच्ची।
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इसके लिए अभिलाष को कई बार आईआईटी खड़गपुर जाना पड़ता था, जिससे पढ़ाई बाधित हुई और उन्हें कई विषयों में बैक परीक्षा देनी पड़ी। कई माह की मेहनत, करीब 30 हजार रुपये खर्च और चार-पांच मोबाइल खराब होने के बाद यह सेंसर तैयार हुआ।
ऐसे काम करता है कार बम डिटेक्टर
इस डिटेक्टर का सेंसर किरणें छोड़ता रहता है। वहीं, बम में अमोनियम नाइट्रेट, हिलीयम और पोटेशियम नाइट्रेट जैसी गैसें होती हैं। इन गैसों से संपर्क होते ही सेंसर खतरा भांप लेगा।
डिटेक्टर में लगे ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) के जरिये कार और बम की लोकेशन का पता मोबाइल पर चल जाएगा। वहीं मोबाइल बम डिटेक्टर भी ऐसे ही काम करता है।
यदि यह छोटा सा डिवाइस आपके मोबाइल में लगा है तो आसपास बम की मौजूदगी की जानकारी एसएमएस के जरिये मिल जाएगी।
देश के लिए बनाऊंगा सेंसर
अभिलाष को हांगकांग की सेंसर कंपनी से ऑफर मिला है। ऑफर से साफ जाहिर हो रहा था कि कंपनी इस सेंसर को अमेरिकी सेना के लिए बनाना चाहती है। अभिलाष के मुताबिक वह अपने देश की सेना के लिए यह सेंसर बनाना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने इस ऑफर को स्वीकार नहीं किया।
माइक्रोसॉफ्ट ने दिया मौका
माइक्रोसॉफ्ट की ओर से आईआईटी खड़गपुर में आयोजित ‘बी प्लान प्रतियोगिता’ में अभिलाष का चयन शीर्ष 20 के लिए हो चुका है।
इसमें हजार छात्रों ने भाग लिया था। इसके अलावा जनवरी 2014 में होने वाले जीईएस सेमिनार में भी अभिलाष शिरकत करेंगे, जिसमें दुनियाभर के विशेषज्ञ और वैज्ञानिक शिरकत करने जा रहे हैं।
