खतरनाक बीमारी से बेखबर हैं दो मासूम

अल्मोड़ा। अल्मोड़ा जिले के एक दूरस्थ गांव के दो मासूम दस साल की लड़की और आठ साल का लड़का एड्स जैसी खतरनाक बीमारी से बेखबर गांव के स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं। इन बच्चों की बड़ी बहन भी है जो सौभाग्य से इस बीमारी की चपेट में आने से बच गई। इसी बीमारी के चलते इनके पिता की करीब छह साल पहले और मां की दो साल पहले मौत हो चुकी है। इन बच्चों को किसी तरह उनके ताऊ का परिवार पाल रहा है। ताऊ की माली हालत भी ठीक नहीं है।
इन अभागे बच्चों के पिता सेना में सिपाही थे। सेना ने मेडिकल बोर्ड की संस्तुति पर 2001 में 13 साल की सेवा के बाद उसे रिटायर कर दिया। 2007 में बीमारी के चलते उसकी मौत हो गई। दो साल पहले मां की भी मौत हो गई। बच्चों के ताऊ का परिवार इन्हें अपने बच्चों के साथ ही रख कर पालन कर रहे हैं। इन बच्चों के साथ वह किसी तरह का भेदभाव नहीं रखते। ताऊ ने कहा यह बच्चे उनका खून हैं और अपनी सामर्थ्य के मुताबिक वह उनकी परवरिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि कोई संस्था या सरकारी स्तर पर बच्चों को किसी हॉस्टल आदि में ठिकाना मिल जाता तो पढ़ाई के साथ ही इनका बेहतर उपचार भी हो सकता है। पीड़ितों के लिए सरकार से नि:शुल्क दवा तो दी जा रही है लेकिन दवा लेने के लिए परिजनों को 200 किमी दूरी तय कर स्वयं के खर्चे से हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल जाना पड़ता है। इतना ही नहीं छह माह में एक बार दोनों मासूमों की स्वास्थ्य जांच के लिए परिजन अपने खर्चे से ही हल्द्वानी ले जाते हैं। उधर कानूनी अड़चन के कारण बिना मां-बाप के इन एड्स पीड़ित बच्चों के बैंकों में खाते भी नहीं खुल पा रहे हैं। इस कारण उन्हें सरकार से मिलने वाली छात्रवृत्ति का भुगतान भी एक साल से नहीं हो सका है।
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एक गर्भवती महिला और पति एड्स से ग्रस्त
अल्मोड़ा। जिले के इस दूरस्थ गांव के निकटवर्ती एक अन्य गांव में भी इस लाइलाज बीमारी से एक दंपति ग्रस्त है। एड्स से पीड़ित महिला वर्तमान में गर्भवती है। डाक्टर इस उम्मीद के साथ पीड़ित गर्भवती को दवाएं दे रहे हैं कि उसका जन्म लेने वाला बच्चा एचआईवी पाजिटिव न हो।

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