
मंडी। जिले की 128 पंचायतों में केंद्र सरकार की एकीकृत जलागम प्रबंधन कार्यक्रम योजना को लागू किया जाएगा। 106 करोड़ की इस परियोजना का मकसद बूंद-बूंद पानी को किसानों के खेतों तक पहुंचाना है। साथ ही पहाड़ों की ढलानों पर बहने वाले नालों के पानी को चेकडैम के माध्यम से रोककर जल संग्रहण टैंकों में एकत्रित करना है। स्प्रिंकल सिंचाई योजना से खेतों की सिंचाई कर सब्जियां और अन्य नकदी फसलें पैदा की जा रही हैं। इस कार्यक्रम में भूमि तथा जल प्रबंधन के प्रयोजन के लिए क्षेत्र के विकास कार्यक्रमों में प्रयोगता समूहों की सक्रिय भागेदारी सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ आजीविका वर्धन, उत्पादन प्रणाली और लघु उद्यम संबंधी कार्य करने का प्रावधान है। मंडी जिले में इस कार्यक्रम के तहत 11 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं। इसके अतिरिक्त दो और परियोजनाएं स्वीकृति के लिए प्रस्तावित हैं। इसमें 33 पंचायतों में 12967 हेक्टेयर क्षेत्र का उपचार किया जाएगा। इसके लिए 19.45 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। समूहों को परियोजना की लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिक से अधिक दो लाख रुपये तक सहायता अनुदान देने का प्रावधान है। इसके तहत 830 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है। इनमें से 243 समूहों को 62.34 लाख की राशि दी जा चुकी है।
उपनिदेशक एवं परियोजना निदेशक जिला जलागम विकास अभिकरण किशोरी लाल शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से मंडी जिले को 106 करोड़ की एकीकृत जलागम प्रबंधन परियोजना स्वीकृत की है। इसे 128 पंचायतों में लागू किया है। 33 पंचायतों के लिए दो और परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं का मकसद जल संग्रहण से लोगों की आर्थिक स्थिति समृद्ध करना है। इसके लिए कला-जत्था और अन्य जागरूकता शिविरों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाता है।
