
शिमला। मरीजों का मर्ज दूर करने वाले राजधानी के बड़े अस्पताल खुद बीमार हो गए हैं। महिलाओं के सबसे बड़े कमला नेहरू अस्पताल और दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल रिपन (जोनल) में मरीजोें के अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे। दोनों ही अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं। लिहाजा अल्ट्रासाउंड के लिए इन अस्पतालों से मरीजों को राज्य के सबसे बड़े इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (आईजीएमसी) रेफर किया जा रहा है। यहां मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए 15 से 20 दिन बाद की तारीख दी जा रही है।
टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद ही डाक्टर मरीज का उपचार शुरू कर पाते हैं। इस स्थिति में मरीजों का इलाज देरी से हो रहा है। कई बार देर से अल्ट्रासाउंड होने पर मरीज की जान पर बन आती है। निजी क्लीनिकों में 500 से 800 रुपये शुल्क वसूला जा रही है। सरकारी अस्पताल में अल्ट्रा साउंड टेस्ट 60 रुपये में हो जाता है। सबसे अधिक दिक्कत सर्जरी और गायनी के मरीजों को आ रही है। किसी के पेट में दर्द उठा तो डाक्टर अल्ट्रासाउंड की सलाह देते हैं। उसी के बाद आगे इलाज शुरू होता है। इन दोनों अस्पताल में महीनों से यह सुविधा नहीं मिल रही है।
अल्ट्रासाउंड के लिए आईजीएमसी में भी मरीजों को कई दिन इंतजार करना पड़ता है। मरीज को इलाज की जरूरत आज है और अस्पताल उसे पखवाड़े बाद बुला रहा है। इस स्थिति में मरीज के पास अल्ट्रासाउंड के लिए निजी क्लीनिक में जाने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं। इसमें सबसे अधिक प्रभावित बीपीएल मरीज हो रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत जिन मरीजों के हेल्थ कार्ड बने हैं, उनके सभी टेस्ट मुफ्त होते हैं। लेकिन जब यहां टेस्ट ही नहीं, तो सुविधा का तो सवाल ही नहीं।
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महकमे को किया है सूचित
डीडीयू के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. डीएस कंवर ने कहा कि रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण बीते करीब पांच महीने से दिक्कत पेश आ रही है। महकमे को इस बारे में सूचित किया गया है।
