चरस तस्करों को 20-20 साल की कैद

बिलासपुर। चरस तस्करी के एक मामले में घुमारवीं के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेश जसवाल की अदालत ने वीरवार को बिलासपुर कैंप के दौरान तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अभियुक्तों को चार-चार लाख रुपये जुर्माना भी अदा करना पड़ेगा। जुर्माना न देने की सूरत में उन्हें दो-दो साल के अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी। अदालत ने चरस तस्करी के लिए प्रयोग की गई स्कोडा कार को प्रदेश सरकार में निहित करने का भी आदेश दिया।
घुमारवीं के उप जिला न्यायवादी संदीप अत्री के अनुसार 6 नवंबर, 2012 को एएसआई सेवा सिंह की अगुवाई में पुलिस के एक दल ने स्वारघाट में नाका लगा रखा था। दोपहर करीब दो बजे मंडी की ओर से आई एक स्कोडा कार डीएल-3सीएवाई-7668 को निरीक्षण के लिए रोका गया। कार में चच्योट (मंडी) के छपराहण गांव का प्रकाश चंद, सुराह गांव का राजकुमार व सैंज (कुल्लू) के पोखरी गांव का कृष्ण कुमार सवार थे। गाड़ी के भीतर से चरस की बदबू आ रही थी। इस पर कार स्वारघाट थाने ले गए।
थाना में नयनादेवी के डीएसपी मनोहर लाल की मौजूदगी में कार की तलाशी ली गई। कार की पिछली सीट का लॉक खोलने पर वहां लोहे की एक शीट पाई गई, जिसके बीच में एक बड़ा सा सुराख किया गया था। सुराख के भीतर से पालीथिन में लिपटी हुई चरस बरामद हुई। 26.150 किलोग्राम चरस की यह खेप दिल्ली ले जाई जा रही थी। चरस की खेप को मनीकर्ण घाटी के जरी से पंडोह तक एक इनोवा कार में लाया गया था, जबकि स्कोडा कार को मंडी तक एक इटियोज़ कार ने एस्कार्ट किया था। दोनों गाड़ियां बाद में नारकोटिक्स ब्यूरो दिल्ली से रिलीज हो गई थीं। अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत 20-20 वर्ष के कठोर कारावास व चार-चार लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

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