
मंडी। रेट लिस्ट लगाने के विरोध में सब्जी विक्रेताओं ने दूसरे दिन भी हड़ताल कर कारोबार बंद रखा। शहर के लोगों को दूसरे दिन भी हरी सब्जियां नहीं मिल पाईं। हालांकि स्थानीय प्रशासन ने आढ़तियों और सब्जी विक्रेताओं से वार्ता में कोई नतीजा न निकलने पर सेरी मंच पर किसानों को सीधे अपने उत्पाद बेचने की अनुमति दी थी लेकिन बुधवार को सेरी मंच पर कोई भी किसान सब्जी बेचने नहीं पहुंचा। साथ ही शहर के चौहटा में हर रोज की भांति गांव से सब्जी लेकर आने वाले किसान भी कम नजर आए। इससे लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
रेट को लेकर उपजा गतिरोध अभी तक नहीं थम पाया है। बुधवार को सब्जी विक्रेताओं ने दूसरे दिन भी हड़ताल रखकर कांगणी मंडी से सब्जी नहीं खरीदी। सब्जी विक्रेताओं द्वारा गठित यूनियन के प्रधान देशराज राणा, उपप्रधान राकेश कुमार, हेम सिंह, सुरेंद्र कुमार और सलाहकार भूपेंद्र सिंह ने कहा कि जब तक सब्जी विक्रेताओं की मांगों पर गौर नहीं किया जाता तब तक कांगणी मंडी से सब्जी नहीं खरीदेंगे। दूसरे दिन भी मंडी शहर के सभी सब्जी विक्रेताओं ने हड़ताल कर कारोबार बंद रखा।
दूसरे दिन भी शहर में सब्जी न मिलने से लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। घरों में आलू और प्याज भी खत्म हो गया है। इससे अब दाल से लोगों को गुजारा करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी बीके शर्मा, सुभद्रा देवी, वनिता देवी, सुरजीत कुमार, पवन शर्मा, पंकज और ज्ञान चंद ने कहा कि दूसरे दिन भी शहर में सब्जी न मिलने से काफी मुश्किलें लोगों को झेलनी पड़ी हैं। लोगों को दाल से ही गुजारा करना पड़ रहा है।
इस मामले पर बढ़ा है विवाद
एडीएम पंकज राय की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया था कि मंडियों में कार्यरत आढ़तियों द्वारा जारी क्यू फार्म यानी पक्के बिल के आधार पर परचून भावों की दरें तय की जाएंगी। लाभांश की दर नियमानुसार 10 से 25 प्रतिशत तक रहेगी। इस रेट को फुटकर विक्रेताओं को अपने कारोबार स्थल पर लगाना अनिवार्य होगा। लेकिन आढ़तियों ने पक्का बिल काटने में असमर्थता जताई। फुटकर सब्जी विक्रेताओं ने 10 से 25 प्रतिशत लाभ पर सब्जी बेचने का विरोध किया था।
