
धारचूला (पिथौरागढ़)। दारमा और व्यास घाटी के सभी गांवों से लोग माइग्रेशन पर जा चुके हैं। धारचूला तहसील के बीस गांवों के लोग मौसमी प्रवास पर निकलते हैं। इस माह के अंत तक यह लोग टनकपुर, खटीमा पहुंच जाएंगे। अप्रैल में इनकी वापसी होने लगेगी।
माइग्रेशन पर निकलने वाले गांवों के लोग जानवर, भेड़, खाने पीने का सामान लेकर आते हैं। गांव में पहरेदारी के लिए सिर्फ एक दो लोग रहते हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र के इन गांवों में अब हिमपात होने लगा है। जाड़ों के सीजन में आवाजाही बंद हो जाती है। बर्फबारी के कारण जानवरों के लिए चारे की समस्या पैदा होने लगती है। इसी कारण इनको मौसमी प्रवास पर निकलना पड़ता है।
नाभी, रौंगकांग, गुंजी, नपलच्यू, गर्व्यांग, बूंदी, कुटी, दारमा, दर, बुंगबुंग, नागलिंग, बालिग, सौन, फिलम, ढाकर, सीपू, मार्छा, दुग्तू, दांतू, फिलम, गो गांवों के लोग मौसमी प्रवास करते हैं। कुटी के मोहन सिंह कुटियाल ने बताया कि मौसमी प्रवास अतीत से चला आ रहा है। अभी भी लोग इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
