
करसोग (मंडी)। करसोग क्षेत्र की एक गैस एजेंसी में सब्सिडी में हेराफेरी को लेकर आई शिकायत के बाद शुरू हुई छानबीन में कई मामले सामने आए हैं। अभी तक जांच टीम 170 मामलों को लेकर आपत्ति दर्ज कर चुकी है। आशंका जताई जा रही है कि सब्सिडी मामले में कोताही बरती गई है।
इस मामले में एजेंसी के कई कर्मचारी भी लपेटे में आ सकते हैं। गैस एजेंसी में सब्सिडी मामले मे हुई जांच में अब तक अनियमितताओं के एक सौ सतर से अधिक माम का खुलासा हो चुका है। इसमें एजेंसी के कई कर्मचारी संदेह के दायरे में हैं। जांच में पाया गया है कि सिलेंडर सब्सिडी का होने के बावजूद कंप्यूटर से काटे बिलों से अधिक वसूली की गई। इसकी प्रविष्ट भी नहीं की गई है। उपभोक्ताओं को एक हजार से अधिक रुपये में सिलेंडर दिया गया। लेकिन उस वक्त डीबीटी से बाहर पूर्ववत आधार पर ही सब्सिडी पर गैस मिलनी थी। जांच कर रहे अधिकारी ने इस बारे में अन्य उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया है। दूसरी ओर गैस एजेंसी प्रबंधन किसी भी तरह की हेराफेरी से मना कर रहा है।
गैस एजेंसी प्रबंधक का कहना है कि उपभोक्ताओं से कोई हेराफेरी नहीं हुई है। आधार कार्ड न होने से सब्सिडी उपभोक्ताओं के खातों तक नहीं पहुंची है। गौरतलब है कि करसोग गैस एजेंसी पर गैस सब्सिडी मामले में हेराफेरी और अनियमितताओं की एक वरिष्ठ नागरिक ने शिकायत की थी। वरिष्ठ नागरिक ने ई समाधान के जरिये मुख्यमंत्री से उचित कार्रवाई का आग्रह किया था। मामले की जांच कर रहे खाद्य आपूर्ति निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक रमाकांत चौहान का कहना है कि मामला गंभीर है। अनियमितताओं से इन्कार नहीं किया जा सकता। अभी जांच चल रही है। उपभोक्ताओं से बिलाे की और जानकारियां मांगी गई हैं।
