
गाजियाबाद: किशोरी आरुषि तलवार और घरेलू सहायक हेमराज की सनसनीखेज हत्या के करीब साढ़े 5 वर्ष बाद एक विशेष सी.बी.आई. अदालत 25 नवम्बर को अपना फैसला सुनाएगी कि क्या इस मामले में उसके माता-पिता दोषी हैं।
फैसले के मद्देनजर अदालत परिसर में सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए गए हैं। इस मामले में गत 12 नवंबर को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश श्याम लाल ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस हत्याकांड में आरुषि के अभिभावक डा. राजेश तथा नूपुर तलवार मुख्य आरोपी हैं।
बचाव पक्ष की ओर से हर प्रकार की कार्रवाई पूरी कर लेने के बाद अदालत अब आज इस मामले में अपना फैसला सुनाएगी। सीबीआई ने अपने अंतिम फैसले में कहा था कि राजेश और नुपुर तलवार ने ही आरुषि तथा हेमराज का कत्ल किया है।
वहीं बचाव पक्ष का यह कहना था कि इसमें राजेश और नूपुर तलवार को फंसाया जा रहा है। अदालत ने इस मामले की सुनवाई 15 माह पूर्व इसके संदर्भ में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज करने के बाद की। शुरुआत में शक की सुई राजेश तलवार पर, उसके बाद उनके मित्रों के घरेलू सहायकों पर, फिर राजेश और उनकी पत्नी पर गई। यह मामला हमेशा से ही मीडिया में छाया रहा।
उल्लेखनीय है कि गत 16 मई 2008 को नोएडा के जलवायु विहार में 14 वर्षीय आरुषि मृत पाई गई थी और अगले दिन डा. राजेश तलवार के नौकर की लाश घर की छत पर पाई गई थी।
पेश है इस हत्याकांड से संबंधित मुख्य तिथियां-
16 मई, 2008 : आरुषि तलवार को नोएडा स्थित अपने घर में मृत पाया गया, उसके गले की नस कटी हुई थी। नेपाली घरेलू नौकर हेमराज पर हत्या का संदेह।
17 मई : हेमराज का शव तलवार के घर की छत पर मिला।
18 मई : पुलिस ने कहा कि हत्या सर्जरी की सटीकता से की गई।
23 मई : आरुषि के पिता राजेश तलवार दोहरी हत्या के लिए गिरफ्तार।
31 मई : मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के सुपुर्द।
13 जून : राजेश तलवार का कंपाउंडर कृष्णा गिरफ्तार। 10 दिनों बाद तलवार दंपत्ति के चिकित्सक मित्र का नौकर और तलवार के पड़ोसी का नौकर विजय मंडल भी गिरफ्तार।
12 जुलाई : सीबीआई द्वारा सबूत जुटा पाने में असफल रहने पर राजेश को जमानत।
5 जून 2010 : सीबीआई ने तलवार दंपत्ति पर नार्को जांच के लिए अदालत में याचिका दाखिल की।
29 दिसंबर : सीबीआई ने मामला बंद करने की रिपोर्ट दाखिल की और कहा कि मुख्य संदिग्ध राजेश है, लेकिन उसके खिलाफ सबूत नहीं है।
25 जनवरी 2011 : राजेश तलवार पर गाजियाबाद अदालत परिसर में हमला।
9 फरवरी : गाजियाबाद की विशेष अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी और कहा कि आरुषि हत्या मामले में राजेश और नुपुर तलवार पर मामला चलाया जाए। दंपत्ति पर सबूत मिटाने का भी आरोप है। गाजियाबाद की एक सीबीआई अदालत ने दंपत्ति के खिलाफ अदालत में उपस्थित नहीं होने के लिए जमानती वारंट जारी किया।
14 मार्च 2012 : सीबीआई ने अदालत में राजेश तलवार की जमानत याचिका खारिज करने की अपील की।
30 अप्रैल : नुपुर तलवार की गिरफ्तारी।
3 मई : सत्र अदालत ने नुपुर तलवार की जमानत याचिका खारिज की।
25 मई : तलवार दंपत्ति पर गाजियाबाद अदालत ने हत्या, सबूत मिटाने और षडय़ंत्र करने का आरोप लगाया।
25 सितंबर : नुपुर तलवार को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर जमानत।
अप्रैल 2013 : सीबीआई अधिकारी ने अदालत से कहा कि आरुषि और हेमराज की हत्या तलवार ने की। सीबीआई ने अदालत से यह भी कहा कि आरुषि और हेमराज को आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया था।
3 मई : बचाव पक्ष के वकील ने एक विशेष अदालत में पूर्व सीबीआई संयुक्त निदेशक अरुण कुमार (गवाह के रूप में) सहित 14 लोगों को सम्मन भेजने के लिए याचिका दाखिल की। सीबीआई ने याचिका का विरोध किया।
6 मई : निचली अदालत ने 14 लोगों को सम्मन भेजने की तलवार की याचिका खारिज की। उसने राजेश और नुपुर तलवार के रिकार्डेड बयान लेने के आदेश दिए।
18 अक्टूबर : सीबीआई ने जिरह बंद की और कहा कि तलवार दंपत्ति ने जांच को गुमराह किया है।
12 नवंबर : अदालत ने अपना फैसला 25 नवंबर तक के लिए सुरक्षित रख लिया।
25 नवंबर : अदालत मामले में फैसला सुनाएगी।
