
रिवालसर (मंडी)। तीन धर्मों की स्थली रिवालसर की पवित्र झील से मछलियों को निकालकर ब्यास में छोड़ा जा रहा है। यह झील में बढ़ रही मछलियों की संख्या तथा उनके लिए कम पड़ रहे आवास के मद्देनजर किया जा रहा है। झील में आयतन के आकार से मछलियाें की संख्या अधिक हो रही है। इससे सैकड़ों मछलियां हर साल बेमौत मर रही हैं। इस पर अंकुश पाने के लिए मत्स्य विभाग मछलियों को ब्यास में शिफ्ट कर रहा है।
मछलियों की संख्या बढ़ने से झील में प्रदूषण और गंदगी की मात्रा लगातार बढ़ रही है। गर्मी के मौसम में पानी कम होने तथा बरसात में गंदगी बढ़ जाने से टनाें के हिसाब से हर साल मछलियों की मौत हो रही है। झील की मछलियाें को पवित्र माना जाता है इसलिए न तो इन मछलियों को मारा जाता है और न ही खाया जाता है। इससे झील में लगातार इनकी संख्या बढ़ रही है। मछलियाें की बढ़ती संख्या पर काबू पाने के लिए मछलियाें को यहां से निकाला जा रहा है।
मत्स्य विभाग अब तक झील से करीब 800 मछलियाें को मंडी में ऐतिहासिक गुरुद्वारा के नीचे ब्यास नदी में शिफ्ट कर चुका है। मत्स्य अधिकारी अरुण कांत वर्मा का कहना है कि झील में मिरर कॉर्प प्रजाति की मछलियां हैं जो हर साल ब्रीडिंग सीजन में झील में लाखों के हिसाब से अंडे देती हैं। झील में मछलियों की संख्या काफी बढ़ चुकी है। झील से निकालकर कुछ मछलियों को ब्यास नदी में शिफ्ट किया गया है।
