डेढ़ हजार कारोबारियों पर जुर्माना ठोकने की तैयारी

शिमला। पंथाघाटी ही नहीं बल्कि राजधानी शिमला में ऐसे डेढ़ हजार और कारोबारी भी हैं, जिन्होंने लाइसेंस नहीं बनाए हैं। नगर निगम की संपदा शाखा के मुताबिक अभी तक करीब एक हजार कारोबारियों ने ही लाइसेंस बनाए हैं। शेष कारोबारी अवैध तरीके से कारोबार कर रहे हैं।
नॉन पीएफए लाइसेंस बनाए बिना कारोबार करने वाले करीब 1500 कारोबारियों पर नगर निगम की संपदा शाखा ने जुर्माना लगाने की तैयारी कर ली है। 31 अक्तूबर तक सिर्फ 1100 कारोबारियों ने ही लाइसेंस बनाए हैं। शहर के करीब 2500 कारोबारियों के लाइसेंस बनाए जाने हैं। नवंबर में लाइसेंस बनाने वालों से निगम कुल फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना करेगा। दिसंबर में लाइसेंस बनाने वाले कारोबारियों पर 75 प्रतिशत और इसके बाद वित्तीय वर्ष के अंत तक लाइसेंस बनाने वालों से 100 प्रतिशत जुर्माना वसूला जाएगा। निगम की संपदा शाखा ने 31 अक्तूबर तक 5 साल के एक साथ लाइसेंस बनाए हैं। बीते साल लाइसेंस नहीं बनाने वालों पर 100 प्रतिशत, 2 साल से लाइसेंस नहीं बनाने वालों पर 125 प्रतिशत और 3 साल से अधिक समय तक लाइसेंस नहीं बनाने वाले कारोबारियों पर 150 प्रतिशत जुर्माना किया जाएगा।


जुर्माने के साथ होगी कड़ी कार्रवाई
नगर निगम के सहायक आयुक्त नरेश ठाकुर ने बताया कि खाद्य वस्तुओं और अन्य कारोबार करने वाले कारोबारियों को लाइसेंस बनाना अनिवार्य है। निरीक्षण के दौरान अगर कारोबारी के पास लाइसेंस नहीं मिला तो जुर्माने के साथ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

क्या है नॉन पीएफए लाइसेंस
खाद्य वस्तुओं के अलावा अन्य किसी भी प्रकार का कारोबार करने वालों के नॉन पीएफए लाइसेंस बनाए जाते हैं। 125 वर्ग फीट तक के क्षेत्रफल की दुकानों को 200 रुपये वार्षिक, 126 वर्ग फीट से अधिक को 300 रुपये और होटल, गेस्ट हाउस, गैस कंपनी, कोल कंपनी, डिपार्टमेंटल स्टोर, सिनेमा, प्राइवेट स्कूल, मोटर वर्कशॉप, पेट्रोल पंप, टेंट हाउस, ट्रेवल एजेंसी, क्लीनिक वर्कस और लेबोरेटरी के लिए 500 रुपये वार्षिक शुल्क तय किया गया है।

बिना लाइसेंस बेच रहे खाद्य वस्तुएं
शहर में कई कारोबारी बिना फूड लाइसेंस के कारोबार कर रहेे हैं। निगम की स्वास्थ्य शाखा में न्यू फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड एक्ट के तहत फूड लाइसेंस बनाए जाते हैं। इन लाइसेंस को पीएफए लाइसेंस कहा जाता है। खाने-पीने का सामान बेचने वाले हर कारोबारी को यह लाइसेंस बनाना जरूरी होता है। इसके तहत दुकान मालिक और नौकर की मेडिकल जांच होती है। धाम, भंडारा, शादियों में खाना बनाने वाले लोगों के पास भी यह लाइसेंस होना अनिवार्य है।

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